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 डियर जिंदगी

आज का युग यानि आधुनिकता की और सभी के बदते कदम ! आधुनिकता हम लोगो के व्यवहार में, पहनावे में, बातचीत एवं सभी कार्यकलापों में आसानी से देखी व समझी जा सकती है ! कुछ पा लेने की जिद हर किसी के दिल में है, चाहे वो सही हो या गलत ! लेकिन सही फेसले लेकर ज़िंदगी को डियर ज़िंदगी बनाकर जीने में ही जीवन की सफलता छिपी है !
जिंदगी
जिंदगी यांनी जिसमे जी-जान से लग जाया जाए !  ज़िंदगी हमारे किए गए कर्मो के रिजल्ट्स पर अपना परिणाम देती है ये बात सभी जानते है !  एक बच्चा पहाड़ो पे जाकर ज़ोर से चिललाता है और वही चीख जब पलटकर उसे सुनाई देती है तो वो डर कर वापस भागता है और अपनी माँ को ये बात बताता है कि माँ जो मैं बोलता हूँ वही बात उधर से कोई दूसरा भी बोलता है !  यह सुनकर माँ को सारी बात समझ मे आ गई !
तब माँ ने कहा अब जाकर ज़ोर से बोलो आई लव यू , मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ !  बच्चे ने ऐसा ही किया, और फिर उसे उधर से भी वही आवाज सुनाई दी आई लव यू, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ ! बच्चा बहुत खुश खुश वापस माँ के पास आया और बताया की मम्मी वो भी मुझसे बहुत प्यार करता है 
हमारी ज़िंदगी भी ईसी तरह की गूंज की तरह है, हमें वही वापस मिलता है जो हम अपनी ज़िंदगी को देते है !  अच्छे काम का अच्छा रिज़ल्ट और बुरे काम का बुरा रिज़ल्ट !
अभी एक पिक्चर आई है डियर ज़िंदगी जिसमे फिल्म की नायिका अपनी खुशियों को पाने के लिए हर रोज़ बेतहाशा भागे जा रही है और हमेशा टेंशन में रहती है !  अपनों पर चिल्लाना, खीझ उतारना ये सारी चीज़े उसके व्यवहार में आ जाती है !  फिर एक मनोचिकित्सक द्वारा उसे समुन्द्र की तेज गति की लहरों के साथ आगे पीछे दोड्ने का खेल सीखाने पर समझ आता है कि ज़िंदगी भी एक उतार – चढ़ाव भरी सड़क कि तरह है जहाँ कभी हम डरते डरते फैसले लेते है और कभी तेज़ चाल से चलते हुए अपनी मंज़िल को पा लेते है !
ज़िंदगी एक ऐसा तट/पहलू है जहाँ घटनायेँ कहानियो की तरह घटती है और हमे उन से सीख लेनी चाहिए जैसे बचपन मे  हमारे टीचर/माता-पिता, दादा-दादी/नाना-नानी कहानी सुनाते थे और फिर बताते थे कि इस कहानी से यह सीख मिलती है ! ये हमारे ऊपर है कि हम किस घटना से क्या सीखते है Golden Words  ये है कि अच्छा सोचेगे, तो हमारा आने वाला कल जरुर अच्छा होगा. बेहतर ज़िन्दगी की यही सच्चाई है.
ज़िंदगी को बहतरीन बनाने का एक तरीका आपस में मिलना जुलना भी है क्यूंकी एक दूसरे से मिलकर हम कुछ अच्छा सीख सकते है, एक दूसरे से अपने मन कि बात कह सकते है, एक दूसरे को दाधस बंधा सकते है इसलिए कहा जाता है कि  तनाव खत्म करने का बड़ा रास्ता लोगों से मिलना जुलना है !
  
इस संदर्भ में एक बात कहना जरूरी है कि कबीरदास जी का एक दोहा है कि काल करे सो आज कर आज करे सो अब ! इसका सीधा सा अर्थ ये है कि किसी भी काम को करने में देर नहीं करना चाहिए। लेकिन कभी कभी जीवन के अनुभवो से समझ आता है ये बात सभी कामों के लिए सही नहीं है। कुछ काम ऐसे भी हैं, जिनमें देर करना अच्छी बात है जैसे कि बहुत अधिक राग, द्वेष, वाद-विवाद, घमंड, पापकर्म इत्यादि क्यूकि समय के साथ साथ ये अवगुण हमारे व्यवहार में आ ही जाते है !  इन सब कि अधिकता से जीवन का सुख और संतोष नष्ट हो जाता है !  जीवन से मधुरता चली जाती है 
अततः कोई भी कार्य करने से पहले हमे सोचना चाहिए कि हम क्या करने जा रहे है और इसके क्या परिणाम हो सकते है !

जीवन का हर क्षण अनमोल है इसकी कोई कीमत नही है जब तक जिये भरपूर जिये और हमेशा खुश रहे, दुनिया में काम किसी का नहीं रुकता, लेकिन काम का तरीका आपको लंबे समय तक सफलता के शीर्ष पर टिकाए रख सकता है। कोशिश करनी चाहिए कि ज़िंदगी ज़िंदगी ना होकर डियर ज़िंदगी हो जिसमे फूलो सी महक आती हो, झरनो जैसी छनछनाहट हो, प्यार का भंडार हो, अनलिमिटेड खुशी हो ! 
अंत में 
जरूरी नहीं है कि हर बात पर आप मेरा कहा मानो 
दहलीज़ पर रख दी चाहत, अब आगे आप जानो 



- कुलजीत भार्गव
लखनऊ 

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