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मासूम गुड़िया 

देखा एक मासूम सी जान को
जिसने पहना साधारण वस्त्रो को 
जो खेल रही है घर के आँगन मे
और छिप रही है माँ के आँचल मे
मोनिका मिश्र
मोनिका मिश्र

हाँ थी वो एक न्यारी चिड़िया
और माता - पिता  की प्यारी गुड़िया 
जिसकी एक मुस्कान से मिट थे सारे दुख 
और मिल जाता था जीवन का हर सुख 

अचानक एक आया ऐसा पल
जिसने बदल दिया मासूम का कल
आया  एक दरिंदो का झुंड 
जिसने बनाया साजिशो का कुंड

नन्ही चिड़िया को उठा लिया 
अपनो की छाँव से दूर किया
तोड़ दिया सम्पूर्ण सपनो को
बेच दिया नन्ही गुड़िया को

पहनी घुँघरू पाँव मे गुड़िया 
नाची छम-छम देखी दुनिया 
कुछ ने गंदी निगाह है तानी
तो कुछ ने एक रात  है मांगी 

पर मासूम है इससे अंजान 
समझ रही है इसको शान
सुलाया है मखमल की चादर मे
और फंसाया है वेश्यावृत्ति के दलदल मे

पर अब ,नन्ही गुड़िया हुई सयानी 
सुना सुनाकर अपनी कहानी 
रोई और  बलखाई दामिनी 
चीख-चीख कर पूछ रही 
कि-
मेरी गलती हुई क्या सयानी 
नारी हूँ न कोई नई कहानी
घाट - घाट का ,न पीयु पानी 
जननी है नाम हमारा
जिससे उपजते देश सारा


यह रचना मोनिका मिश्र जी द्वारा लिखी गयी . आप अभी अध्ययनरत है और साहित्य लेखन करती हैं . 

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  1. Ye kavita dil ko choo jane wali h ek ldki ki dil ki bat lafzo m baya ki h
    Monika mishra All the best

    उत्तर देंहटाएं
  2. Bahut achi kahaani hai ye kahaani kisi aam kahaani se km nhi hai...ladkiyo ki Zindagi kuch isi tarah ho gai h..apne faisle nhi le skti kahi ja nhi skti esa lgta h Umar k sth unki Zindagi chini ja rhi h..zamaana badal gya h lekin kuch manushyo ki soch abhi Tak nahi badla h or na kbhi bdlega😢☹️

    उत्तर देंहटाएं

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