0
Advertisement

बदलाव

 समय की घड़ी में
 समय भी समयानुसार नहीं चलता
 वह बदल देता है दिशा अपनी
 तनिक देर में
 कुछ इस तरह
बदलाव
 जैसे बड़बड़ा कर  बदल जाती है जीभ
 और जो घुस जाती है
 तपाक से भीतर मुहं के
 समय बदल देता है
 दुःख को सुख में
 सुख को दुःख में
 रोते को हँसा देता है,
 हँसते को रुला देता है
 और तो और लगे हाथ
 छोटों से बड़ों को पिटवा भी देता है
 वह बना देता है रंक को राजा
 राजा को रंक
 समय घुल जाता है
 जीवन में सहसा कुछ इस तरह
 जैसे
 पानी में नमक
 और जो बन जाता है                        
 दो चीज़ों के स्वाद के
 बदलाव का गवाह।



- आमिर विद्यार्थी, जेएनयू दिल्ली

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top