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बारिश में भीग  जाना


बारिश में भीग  जाना
बारिश में भीग  जाना
आओ ना,
पास आओ ना,
बारिश में भीग जाना
बूँदों की लड़ियाँ
माथे पर जड़ना
उठा दोनों  बाजू
छमाछम हो जाना,

कहते हैं!
बारिश में भीगने का
आनंद ही अजीब होता है
मिठास भरा
विकल्प होता है
पीड़ा हरने वाला
पल होता है।

मैंने भी बारिश में
खुद को समेट लिया है
सीख लिया है
भर लिया है
मधु प्याला उड़ेलकर।




रचनाकार    परिचय  - नाम-  अशोक बाबू माहौर
साहित्य लेखन -हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में संलग्न
प्रकाशित साहित्य-विभिन्न पत्रिकाओं जैसे -स्वर्गविभा ,अनहदकृति ,सहित्यकुंज ,हिंदीकुंज ,साहित्य शिल्पी ,पुरवाई ,रचनाकार ,पूर्वाभास,वेबदुनिया आदि पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित I
साहित्य सम्मान -इ पत्रिका अनहदकृति की ओर से विशेष मान्यता सम्मान २०१४-१५ से अलंकृति I
अभिरुचि -साहित्य लेखन ,किताबें पढ़ना
संपर्क-ग्राम-कदमन का पुरा, तहसील-अम्बाह ,जिला-मुरैना (म.प्र.)476111
ईमेल-ashokbabu.mahour@gmail.com
9584414669 ,8802706980 

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