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पास हूँ मैं

पल्लवित हों आशाएं तेरी
पुष्पित मन के गीत।
जीवन की बगिया आनंदित
महकी महकी प्रीत।

साथ तुम्हारा सुख देता है।
रूप करे बेचैन।
जीवन के अनुगामी पथ पर।
बाट जोहते नैन।

उस धारे पर तुम बैठे हो।
मैं बैठा इस पार।
मिलना कितना मुश्किल देखो
बीच नदी की धार।

काश मिले तुम मुझ को होते।
जीवन के उस मोड़ पर।
जहां से हम दोनों संग चलते।
सारे बंधन तोड़ कर।

तन बंधन में बैठा देखो।
मन तो तेरे पास है।
रहे पल्लवित जीवन तेरा।
मेरे मन की आस है।

नहीं सोचना दूर हूँ तुमसे।
मन मे अंकित बैठा हूँ।
एक नजर अंदर डालोगी।
गहरे तक मैं पैठा हूँ।

- सुशील शर्मा

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