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मन का बोझ

मन का बोझ बड़ा है,
वो आज मेरे सामने खड़ा है।
मन का बोझविवश हूं आज भी,
एक पर्दा ही तो पड़ा है।
रूह भी कहती है मुझसे,
ये तू नहीं तेरा दिल बड़ा है।
हर त्याग मुझे स्वीकार,
वनवास से ही प्यार है।
हर दीपक की यही पुकार है,
बेटा मां का प्यार है।
जगत में ही अँधियार है,
विषमता-मूलक संसार है।
पथ की दृढ़ता मुझे स्वीकार है।
राह के रोड़े ही सही।
जिन्दगी के हर एक,
कांटों से मुझे प्यार है।
मंज़िल के आँसुओ से,
दिखता ये संसार है।
मिल जाए उस-दिन,
विश्व विजय की ललकार है।


आशा की किरण       

आशा की किरण से भी,
मैं युद्ध करने जाऊंँगा  ।
इन्हीं किरणों से,
मैं जंग जीत के आऊँगा ।
हर तपिश उजियारे में,
मैं खुद को तड़पाऊँगा ।
इन्हीं तड़प को मैं,
अपना अस्त्र बनाऊँगा।
राह नहीं अकेला मेरा,
फिर भी हिम्मत जुटाऊँगा।
हर बारिश की बूंदों में,
हर डूबते सूरज को मैं जगाऊँगा ।



- हिमांशु उइके
एन-२२/२३, आदर्श नगर दुर्ग, छत्तीसगढ़
मोबाइल-9406475477

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