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पुस्तक : लोक का प्रभाष (जीवनी )
लेखक : रामाशंकर कुशवाहा

किताब के विषय में:
लोक का प्रभाष (जीवनी )
प्रभाष जोशी ने हिन्दी पत्रकारिता को नए मुकाम तक पहुँचाया। शब्द और कर्म की एकता के विश्वासी प्रभाष जोशी ने जन-संबद्ध पत्रकारिता के एक नए दौर की शुरुआत की। उनके द्वारा सम्पादित 'जनसत्ता’ अपने समय की जन-संवेदना का नायाब दस्तावेज़ है। हिन्दी पत्रकारिता के विकास में ऐतिहासिक भूमिका निभानेवाले प्रभाष जोशी के जीवन की यह कहानी उनके समय की भी कहानी है, क्योंकि उनके लिखने और जीने की एक ही मंजि़ल थी—लोक-संबद्धता।
इस लोक-संबद्ध व्यक्तित्व की जीवन-गाथा के अनेक पड़ाव हैं। इस जीवनी में आपको उन पड़ावों का विस्तृत और प्रामाणिक विवरण मिलेगा। प्रभाष जी के व्यक्तिगत जीवन के अनजाने प्रसंगों से आप रू-ब-रू होंगे। उनके सार्वजनिक जीवन के निर्भय सोच के सन्दर्भों से आप अवगत होंगे।
हिन्दी के जीवनी साहित्य की परम्परा में प्रभाष जी की यह शोधपरक जीवनी एक नई पहल है। प्रभाष जी की लोक-संबद्ध जीवन-दृष्टि को समझने और उसका विस्तार करने में यह जीवनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 
    
लेखक परिचय
रामाशंकर  कुशवाहा
7 जुलाई, 1980 में गाजीपुर जिले (उत्तर प्रदेश) के धर्मागतपुर ग्रामसभा में जन्म।
प्राथमिक शिक्षा गाँव में। स्नातक बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से।
स्नातकोत्तर, एम.फिल. और पी-एच.डी. दिल्ली विश्वविद्यालय से।
सम्प्रति : दयाल सिंह महाविद्यालय (दिल्ली विश्वविद्यालय) में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत।
बाईंडिंग हार्डबाउंड /पेपरबैक 
प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन 
मूल्य हार्डबाउंड:  695/-
मूल्य पेपरबैक : 250/-
पन्ने : 328
वर्ष : 2017
आईएसबीएन हार्डबाउंड  : 978-81-267-3054-4                             
आईएस बी एन पेपरबैक : 978-81-267-3060-5   

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