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कुछ देर ठहरो

कुछ देर ठहरो,,,,
अरे सुनो ,सुनो तो सही
बस एक बार
रुक जाओ ना,,,,
जानती हूँ की जाना है तुम्हे
बरसो पुराने रिश्ते को छोड़कर,,
नहीं रोकूँगी तुम्हे
चले जाना फिर
अशी रॉय
अशी रॉय
जहाँ चाहो ,जैसे चाहो
क्यूँ रोकूँ जब मन ही नहीं है तुम्हारा,,,
बस इतना करना
सिर्फ शरीर से ही नही
मन और यादों से भी 
इतने दूर चले जाना
की आ न सको वापस,,,,
पर यूँ ही रुको
ठहरो कुछ देर
आँख भर देख लूँ
तुम्हारी खुशबू भर लूँ
अपनी सांसों में 
क्या पता फिर मिलें न मिलें,,,
एक मुट्ठी भर हंसी
और कुछ प्यारी सी बातें
देकर तो जाओ ना
मेरे लिए सरल होगा 
ये जीवन जीना,,,,
अरे! सकुचा रहे हो
पास बैठने से
कल तक तो ना होता था ये संकोच
आज मै पराई हो गयी
ये अचानक कैसे हुआ,,,
पर कोई बात नहीं
घडी भर ही सही
तुम्हे निहार लूँ
हमेशा की तरह आँखों से तेरी
तुम्हारी नज़र उतार लूँ,,,
चलो बहुत हुआ मनुहार
अब नही मनाऊँगी
पर पिछे मुड़ कर मत देखना
अगर कहीं टूट गयी
तो फिर जाने नहीं दूँगी,, 
पर फिर भी कुछ पल रुको,,
कुछ देर तो ठहरो,,,कुछ देर

- अशी रॉय 

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