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कलम की लाश पड़ी है


कफन पहना दो
और
कलम की लाश
कलम की लाश
कहीं दूर दफना दो
टुकड़ों में मत बांटों
बल्कि जरा सा सहला दो
क्योंकि
लुट गई है स्याही, खड़ी है कलम
हुक्मरानों की हरकतों से बिखरी हुई
वेद और बुद्ध के देश में
बेइमानी और झूठ से पूरी तरह उखड़ी हुई
देखो न !
इंसानियत के मरते ही
और
ईमान के सोते ही
कैसे यहां
तलवार की धार से ईमानदारी की गर्दन लड़ी है
आज फिर हिंदुस्तान की छाती पर कलम की लाश पड़ी है


-इतिश्री सिंह राठौर



विडियो के रूप में देखें इतिश्री सिंह राठौर (श्री) जी द्वारा - 






इतिश्री सिंह राठौर (श्री) जी, कथाकार व उपन्यासकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। वर्तमान में आप हिंदी दैनिक नवभारत के साथ जुड़ी हुई हैं. दैनिक हिंदी देशबंधु के लिए कईं लेख लिखे , इसके अलावा इतिश्री जी ने 50 भारतीय प्रख्यात व्यंग्य चित्रकर के तहत 50 कार्टूनिस्टों जीवनी पर लिखे लेखों का अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद किया. आप,अमीर खुसरों तथा मंटों की रचनाओं के काफी प्रभावित हैं.

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  1. सच्चाई कितनी भी छिपाई जाये एक ना एक दिन सबके सामने आ ही जाती हैं.

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