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अस्सी की वो शाम   

आज मौसम कितना अच्छा है न चलो कही बाहर चलते है रिया,शिवांगी ने रिया से कहा । नही यार तुम जाओ मुझे
अस्सी की वो शाम
आज कही और जाना है इतना कहकर रिया वॅंहा से चली गई ।आज रविवार था ,पूरे एक साल के इन्तजार के बाद के उससे मिलना होगा । दोपहर के दो बज चुके थे रिया घड़ी की ओर लगातार देखे जा रही थी और शाम होने का इंतजार कर रही थी। अचानक से कमरे में शिवांगी और गरिमा आई जो रिया को साथ बाहर जाने की ज़िद करने लगी। शिवांगी तुम भी न कितनी जिद्दी हो मैंने कहा न मुझे आज कुछ जरूरी काम है तुम दोनो जाओ रिया ने झल्लाते हुए कहा।शिवांगी और गरिमा उठ कर जाने लगी।रिया की निगाहें फिर घड़ी की ओर देखने लगी ।शाम होने को थी रिया जल्दी से तैयार होने को चली गयी। उस शाम न जाने कितने बार रिया ने खुद को आइने में देखा।उस शाम  रिया सबसे खूबसूरत दिखना चाहती थी रोहन की नजरों में।
रोहन ,हा जिसका इंतजार रिया कर रही थी। अचानक रिया के फोन की घंटी बजी  ,रिया ने फोन उठाया हैलो रिया कहा हो तुम मैं बस पहुंचने ही वाला हूँ,रिया के फोन  उठाते ही रोहन ने उससे कहा। रिया और रोहन अपने तय समयानुसार उस जगह पर पहुंचने वाले थे जहां वह दोनों एक दूसरे से पहली बार मिले थे ,अस्सी घाट ।हा बनारस के अस्सी घाट जहां न जाने कितने ही प्रेम कहानियों की शुरूआत हुई। गंगा किनारे की ये जगह न जाने कितने ही संगीत प्रेमियों की पसंदीदा जगहों में से है बल्कि उनके जीवन में भी प्रेम की शुरूआत करता है रोहन जिसकी आवाज को रिया ने पहली बार यहीं सुना  था जब वह गिटार की धुन पर अपने गीत को गुनगुना रहा था तब से हर रोज रिया उस जगह पर उसका इंतजार करने लगी शायद रिया को इस बात का एहसास हो गया था कि गीत की उस धुन ने उसके दिल में जगह बना ली है।  जल्द ही इस एहसास ने रोहन के दिल में जगह बना ली ।अस्सी  घाट एक और प्रेम कहानी की शुरूआत का गवाह बनने जा रहा था  जहाँ  आज तक अनगिनत प्रेम कहानियों की शुरूआत हुई अस्सी की सीढियों पर बैठे उनकी बाते घंटों चलती जिसे न समय की खबर रहती न लोगों की ।एक दूसरे की बातों में खोए उनकी हर एक शाम खूबसूरत और यादगार बन जाती। समय कब तेजी से बिता, यह रोहन के  गैजुऐशन का आखिरी साल था और रिया का दूसरा ।रोहन ने पढ़ाई पूरी  होते ही दिल्ली जाने का प्लान बनाया था सिविल सर्विसेज की तैयारियों के लिए ।रोहन रिया को बनारस अकेले छोड़कर जाना तो नहीं चाहता था पर जो सपने उसने अपने लिए देखे थे वहउसे नहीं छोड़ सकता था, जिन सपनों पर उसके अपनों की उम्मीद थी ।लेकिन जो सपने उसने रिया के साथ संजोए थे वह उसे  भी पूरा करना चाहता था ।आखिरकार वह दिन आ ही गया जब रोहन को दिल्ली जाना था । रिया और रोहन दोनों के लिए ही यह बहुत मुश्किल समय था,  जो एक दूसरे से  से रोज मिला करते थे  अब  न जाने कब उनकी मुलाकात होगी रिया का रो-रोकर बुरा हाल था,रोहन ने भी खुद को बहुत मुश्किल से सम्भाला।पर रिया के आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे ।उस शाम घाट पर न जाने कब रात हो गई। उस शाम घाट भी जरूर रोया होगा  रोहन के रिया से दूर जाने पर ।  क्योंकि जो अस्सी घाट इस प्रेम कहानी की शुरूआत का गवाह बना आज वहीं अस्सी  पर उन दो प्रेमियों को बिछड़ता हुआ देख रहा था उस दिन अस्सी पर दो प्रेमियों के सफर के रास्ते बदल रहे थे ।वह दिन आ ही गया जब रोहन को दिल्ली जाना था रिया भी उसे छोडने स्टेशन तक गई । रोहन के दिल्ली जाने के बाद जितना याद उसे रिया ने किया होगा, उतना ही उन दोनों के याद में अस्सी घाट भी मायूस हुआ होगा क्योंकि हर रोज नये प्रेम कहानियों का गवाह बनने वाला अस्सी आज पुराने प्रेमियों के बिछडने  का भी गवाह बना ।
रिया , ध्यान कहा हैं तुम्हारा शिवांगी ने रिया को आवाज लगाई । तुम आज किसी जरूरी काम से बाहर जाने वाली थी अभी तक यही हो, रिया यह समझ नही पा रही थी कि वो शिवांगी को कैसे बताए कि वह शरीर से तो वहीं थी, पर मन एक साल पहले उन्हीं पुरानी यादों में खो चुका था ।।
                                                                                     
                                                                             
           
लेखिका-आकांक्षा खरवार        
           email-akankshakharwar@rediffmail.com

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