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रक्षाबंधन

ये देश है अपना त्योहार है अपने ,
रक्षाबंधन
रक्षाबंधन
करें दृढ़ भाव से पूर्ण भाई का वचन ।
रक्षा सूत्र रूप हम बाँधे  मोली बंधन ।
स्वदेशी अंदाजा से हम ये त्योहार मनाएँ ।
इस रक्षाबंधन को मिलकर अमर बनाएँ ।
कहीं शलभ सरीखे चुभते इतिहास की
वो घड़िया खुद को फिर से ना दोहराए ?
बनके हुमाँयु कर्मवती का अब श्रृगांर बचाएँ ।
दम तोड़ती परम्पराओं में नवजीवन लाएँ ,
मँहगाई के इस दौर में बहिन से केवल
रक्षा सूत्र रूप  “मनु”  मौली ही मँगवाए ।
इस रक्षाबंधन को मिलकर अमर बनाएँ ।
संदेश ना समझें इसको मेरा
इसे परिवर्तन लहर बनाएँ ।
प्रेम सौहार्द की समझ  मिठाई
इसे घर - घर तक पहुँचाएँ ।
    


   कवि - मनोज कुमार सामरिया “मनु”

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