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देश की माटी हूँ मैं
रानी अवंतिका के शहीदी दिवस पर  

                                                       
तलवार की धार हूँ मैं।
रानी अवंतिका के शहीदी दिवस पर वक्त की हुंकार हूँ मैं।
मौत से जो आंख मिलाए
जिंदगी का वार हूँ मैं।

वीर की बेटी हूँ मैं
इस देश की माटी हूँ मैं।
रक्त में फौलाद बहता।
जिगर से हल्दी घाटी हूँ मैं।

हाथ में मौत का सामान लूंगी।
छाती पर चढ़ कर जान लूँगी।
भारत की ओर गर देखा भी  तो।
आंख की पुतलियां निकाल लूंगी।

सीने में जिगर हो तो आंख उठाना।
सिर पर कफन हो तो सामने आना।
तलवार की धार पर चलती हूँ मैं।
आदत में है दुश्मनों का सिर झुकाना।

- सुशील शर्मा

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