0
Advertisement

शिव वंदना

शिव है अन्तःशक्ति शिव सब का संयोग।
शिवशिव को जो जपता रहे सहे न कभी वियोग।
शिव सदगुण विकसित करें जाग्रत मन मस्तिष्क
शिव की पूजन से बने जीवन सुखद सुयोग।

आत्मज्ञान और मुक्ति का शिव हैं आत्म स्वरूप।
शिव समान दाता नही भक्ति भोग अनुरूप।
शिव के बिन तन शव रहे मिले न मुक्ति मार्ग।
शिव देवों के देव हैं शिव शक्ति प्रतिरूप।

शिव अभिषेक अमोघ है हर्ता दुर्धर पाप।
शिव पूजन मन से हरे कोटि जन्म संताप।
पुण्य संपदा और धन शिव स्तुति परिणाम।
बिल्वपत्र हरता सदा दैहिक दैविक ताप।

गुरुओं के भी हैं गुरु शिव हैं मूलाधार।
मन वांछित पूरित करें शिव की शक्ति अपार।
शिव आत्मा के अधीश्वर शिव ऊर्जा के मूल।
शिव परात्पर ब्रह्म हैं शिव हैं जगत आधार।

श्रावण माह में शिव कृपा बरसे मेह समान।
सोमवार का व्रत रखो शिव को अपना मान।
श्रावण में अभिषेक से मिलते पुण्य हज़ार।
जीवन को प्रगति मिले मिलता सुख सम्मान।

- सुशील शर्मा

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top