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सावन छाया है

सावन में भोले भण्डारी,
भू-धरा पर आया है
द्वार भरा दर्शनाभिलाषी से
"शिव" भोलेदानी कहलाया है।

      बरखा बरस कण-कण में
      शिव-शक्ति समाया है
      हरा-भरा वसुधरा..
      सावन रूत छाया है।

सावन पावन माह में,
महादेव घट-घट में समाया है
पूज्य बना नाग-देवता
नागपंचमी कहलाया है।
बीणा चौधरी
बीणा चौधरी

      सजा कलाईयों पे हरि-चुड़ियाँ,
      सॉवरिया अति भाया है
      उत्साह उमंग भर उर झूमता
      सावन साजन बन आया है।

पिहर चली नवविवाहिता
प्रिय विरह शूल बन सताया है
रचा हाथों में मेहन्दी
सावन प्रेम दर्शाया है।

       भींगी-भींगी सी खुशबू
       उर आनंद समाया है
       नृत्य करता प्रकृति भी
        सावन रूत छाया है।

                          -बीणा चौधरी

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