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रफ़्तार कम क्यूँ है


रफ़्तारये दौर, क्या मांगे, "नीम", कहे शक्कर, कम क्यूँ है,
फ़ना है जहां, जिस पर, कहे चाकर, कम क्यूँ है,

चंद शेर क्या भटके, ज़माने में, मोहब्बत से,
फलां इल्जाम, ये आया, जनाबे-जिक्र, कम क्यूँ है,

सुनो, सरकार की थूं-थूं से, चेहरा, मांजने वालों,
बिका दरबार, बिकी सलवार, निगाहें, नम क्यूँ है,

मेरे जीवन का ये झंझट, तेरे झंझट के माफ़िक है,
महीने जद-जहालत है, कहे इफ़्तार, कम क्यूँ है,

ये पगला जिस्म है ढोंगी, ये पगली आत्मा थोथी,
मची भगदड़ जनाज़ों की, कहें शमशान, कम क्यूँ है,

सियासी घर के पियादों ने, सियासी बात कर दी है,
जनाज़ा देश का निकला, कहे रफ़्तार, कम क्यूँ है......

विश्व राज सिंह “ अल्फाज़ी ”


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