0
Advertisement

प्रेम करोगे तो जानोगे

रूप कई प्रेम के
कौन से प्रेम की
बातें वो किया करता है,
दो कदम चलकर
टूट जाता है अक्सर
रिश्ता कोई,
और कोई प्यारमरने पर भी जिया करता है,
अब कहाँ मिलते है
जीवन यहाँ रिश्तों में
हर रिश्ता जैसे
मतलब के लिए
जिया करता है,

प्रेम को कभी समझोगे
तो जानोगे
ये वो भाषा है
जो कही नही जाती
एहसासों से जुड़ती हैं
प्रेम की असिमता
प्रेम करोगे तो जानोगे

कीमत किसी की
मुस्कुराहट की
आहट किसी के
जज्बातो की
साधना किसी के आंसू की
जोड़गे किसी रोज
कोई बंधन किसी से
तो समझोगे
दिल का लगाना
अपनों की मुस्कुराट पर
सब कुछ लुटाना
उलझन एहसासो की
बातें अनकहे जज्बातो की...........
                 


यह रचना रूबी श्रीमाली जी द्वारा लिखी गयी है।आपने चौधरी चरण सिंह मेरठ यूनिवर्सिटी, से वाणिज्य में परास्नातक की उपाधि प्राप्त की है। आप साहित्य की विभिन्न विधाओं में लेखनी चलाती हैं।                    

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top