0
Advertisement

गायब मोहनदास


इतिश्री सिंह राठौर
इतिश्री सिंह राठौर
सुना है वो आया था उस दिन
हां, देखा था मैंने उसको
आतंकवादियों की गोलियों से  मारे गए
उस जवान की आंखों में
वह तो उस चौराहे  पर भी मौजूद था
जहां कत्ल हो रहा था किसी
मुफ़लिस का धर्म  बचाने की आड़ में
वह बेबस खड़ा रहा  वहां भी
जहां समेट रही थी अपनी लज्जा कोई
दामिनी अंधेर गलियों में
वह तो आया था उस आंगन में भी
जहां कायर क्रूरता से मरने वाले
बेटे की मौत पर मातम मना रही थी बूढ़ी मां
यह सब देखने के बाद फिर लौटकर
न आया मोहनदास
न खयालों में
और न ही इबादत में


इतिश्री सिंह राठौर (श्री) जी, कथाकार व उपन्यासकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। वर्तमान में आप हिंदी दैनिक नवभारत के साथ जुड़ी हुई हैं. दैनिक हिंदी देशबंधु के लिए कईं लेख लिखे , इसके अलावा इतिश्री जी ने 50 भारतीय प्रख्यात व्यंग्य चित्रकर के तहत 50 कार्टूनिस्टों जीवनी पर लिखे लेखों का अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद किया. आप,अमीर खुसरों तथा मंटों की रचनाओं के काफी प्रभावित हैं.

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top