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मृत्यु के पश्चात

पत्नी की मृत्यु के पश्चात
बड़े लाड़-प्यार से 
पाल-पोसकर बड़ा किया था अपनी बिटिया को
आज अकेले ही कर रहे थे सारे नेग-चार
तरु श्रीवास्तव
तरु श्रीवास्तव
उसके ब्याह के
पत्नी की छायाचित्र के साथ।
किसी ने भी विधुर होने के कारण
नहीं माना था उन्हें अशुभ
शुभ कार्यों के लिए त्याज्य।
कुल डेढ़ बरस ही तो हुए थे 
अर्धांगिनी को आये हुए
जब छह महीने की बिटिया को छोड़ वो गयी थी
स्वर्ग सिधार।
तब बिना विचलित हुए ही कर डाला था एक प्रण
नहीं करूंगा दूसरा विवाह
एकाकी ही बिता दूंगा संपूर्ण जीवन
कर डालूंगा अपनी सारी इच्छाओं का बलिदान।
और पत्नी की स्मृति के सहारे ही 
काटा लिया पूरा जीवन
सबने दिया उन्हें देवता तुल्य सम्मान।
क्या एक जननी को भी मिल सकता है इतना सम्मान
बेटी को अकेली पाल-पोसकर बड़ा करने के लिए?
क्या उसे भी माना जा सकता है इतना शुभ 
कि वह भी कर सके सारे नेग-चार 
उसके ब्याह के
अपने पति के छायाचित्र के साथ
उसकी मृत्यु के पश्चात?
-तरु श्रीवास्तव




एक बार फिर

एक बार फिर 
उमर रहा है वात्सल्य
अजन्मा के प्रति
जिसे देखा तक नहीं।
पहले भी कई बार
गर्भ ने आकार लिया है
बिना देखे ही उससे 
घंटों बातें की है मैंने।
हांथ-पांव हिलाते हुए,
किलकारियां भरते हुए 
अपनी ही रचना को साक्षात देखने का स्वप्न
किंतु, 
अभी भी अधूरा है।
हर बार ही विवश कर दी जाती हूं
अपने ही सामने
अपने सृजन को मिटते
देखती रह जाती हूं।
हर बार ही शोक मिटने से पहले
थोप दी जाती है
एक नई कोख।
पुत्र जन्म की खुशियां 
फिर से मननी शुरू हो जाती है। 
एक बार फिर से 
उमर आता है वात्सल्य
अजन्मा के प्रति
जिसे देखा तक नहीं।
- तरु श्रीवास्तव



यह रचना तरु श्रीवास्तव जी द्वारा लिखी गयी है . आप कविता, कहानी, व्यंग्य आदि साहित्य की विभिन्न विधाओं में लेखन कार्य करती हैं . आप पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2000 से कार्यरत हैं। हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, अमर उजाला, हरिभूमि, कादिम्बिनी आदि पत्र-पत्रिकाओं में बतौर स्वतंत्र पत्रकार विभिन्न विषयों पर कई आलेख प्रकाशित। हरिभूमि में एक कविता प्रकाशित। दैनिक भास्कर की पत्रिका भास्कर लक्ष्य में 5 वर्षों से अधिक समय तक बतौर एडिटोरियल एसोसिएट कार्य किया। तत्पश्चात हरिभूमि में दो से अधिक वर्षों तक उपसंपादक के पद पर कार्य किया। वर्तमान में आप ,प्रभात खबर समाचारपत्र में कार्यरत हैं.आकाशवाणी के विज्ञान प्रभाग के लिए कई बार विज्ञान समाचार का वाचन यानी साइंस न्यूज रीडिंग किया।

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