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तेरे गम को दिल से

तेरे गम को दिल सेअल्फाज ए रंग का असलियत दिखाई देती है !
जिसमे तेरी आखों की मासुमियत दिखाई देती है !

जब भी महसुस करता हुँ तेरे गम को दिल से ,
मुझे क्यों दुनिया की बहसियत दिखाई देती है !

हम किससे कहे तेरे हालात ए बयाँ अजनबी ,
हमें हुक्मरानों की नदाँ ए नियत दिखाई देती है !

आज भी बेचैन कर देती है उस शक्स की यादे ,
मुझे उसकी दुश्मनी में इन्सानियत दिखाई देती है !

मैनें उस पल को जिया उसके दो पल साथ से ,
हमें बेरूखी जिन्दगी की जहुन्नियत दिखाई देती है !




यह रचना राहुलदेव गौतम जी द्वारा लिखी गयी है .आपने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की है . आपकी "जलती हुई धूप" नामक काव्य -संग्रह प्रकाशित हो चुका  है .
संपर्क सूत्र - राहुल देव गौतम ,पोस्ट - भीमापर,जिला - गाज़ीपुर,उत्तर प्रदेश, पिन- २३३३०७
मोबाइल - ०८७९५०१०६५४

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