30
Advertisement

समास विग्रह

सामासिक शब्दों के बीच के संबंध को स्पष्ट करना समास-विग्रह कहलाता है। जैसे - देशवासी - देश के वासी,तीर्थराज - तीर्थों का राजा,अणुशक्ति - अणु की शक्ति,विद्यालय - विद्या का आलय,घुड़दौड़ - घोड़ों  की दौड़,माता - पिता - माता और पिता ,जयपराजय - जय और पराजय आदि.

हिंदीकुंज.कॉम में समास विग्रह के उदाहरण दिए जा रहे है .जो की निम्नलिखित हैं -

तत्पुरुष समास ( Tatpurush Samas )

पद  - विग्रह

देशवासी - देश के वासी
तीर्थराज - तीर्थों का राजा
अणुशक्ति  - अनु की शक्ति
विद्यालय  - विद्या का आलय
घुड़दौड़ -  घोड़ों  की दौड़
देवसरी -  देवों की साडी
आप बीती - आप पर बीती
आकाशवाणी - आकाश से वाणी
कर्महीन - कर्म से हीन
कर्मनिरत - कर्म में निरत
कुम्भकार - कुम्भ को करने वाला
काव्यकार - काव्य की रचना करने वाला
गगनचुंबी - गगन को चूमने वाला
ग्रामोद्धार - ग्राम का उद्धार
गिरहकट - गिरहकट
गुरुसेवा - गुरु की सेवा
गृहस्थ - गृह में स्थित
गृहागत - गृह को आगत
हिमकण - हिम के कण
न्यायालय - न्याय का आलय
नगर संस्कृति  - नगर की संस्कृति
साधना स्थल - साधना का स्थल
व्याघ्र चर्म - व्याघ्र का चर्म
जल यात्रा -  जल की यात्रा
नौकगार - नौका का आगार
धनोपार्जन - धन का उपार्जन
आत्मोत्सर्ग - आत्मा का उत्सर्ग
शर शैय्या - शर की शैय्या
कथा साहित्य - कथा का साहित्य
समुद्र यात्रा - समुद्र की यात्रा
पुत्र वधु - पुत्र की वधु
चंद्रोदय - चन्द्र का उदय
चिड़ीमार - चिड़िया को मारने वाला
जन्मांध - जन्म से अंधा
जीवनमुक्त - जीवन से मुक्त
जेब घड़ी - जेब के लिए घड़ी
ठकुरसुहाती - ठाकुर के लिए रुचिकर
तिलचट्टा - तिल को चाटने वाला
दयासागर - दया का सागर
दही बड़ा - दही में भिगोया बड़ा
दुःख संतप्त - दुःख से संतप्त
देश भक्ति - देश के लिए भक्ति
देश निकाला - देश से निकाला
देशगत - देश को गया हुआ
धनहीन - धन से हीन
धर्मविमुख - धर्म से विमुख
नरोत्तम - नरों में उत्तम
नेत्रहीन - नेत्र से हीन
पददलित - पद से दलित
पद्चुत - पद से च्युत
परिक्षोपयोगी - परीक्षा के लिए उपयोगी
पाकिटमार - पाकिट को मारने वाला
पादप - पैर से पीने वाला
पुत्र शोक - पुत्र के लिए शोक
पुस्तकालय - पुस्तक का आलय
मनमौजी - मन से मौजी
मनगढ़ंत - मन से गढ़ा हुआ
मदमाता - मद से माता
मालगोदाम - माल के लिए गोदाम
रसोईघर - रसोई के लिए घर
रामायण - राम का अयन
राजकन्या - राजा की कन्या
विद्यार्थी - विद्या का अर्थी
गिरि कन्दरा - गिरि की कन्दरा
रहस्योद्घाटन - रहस्य का उद्घाटन
भाव विभोर -भाव और विभोर
लक्ष्य भेद -लक्ष्य का भेद
स्वर्गवासी  - स्वर्ग का वासी
धर्मनिष्ठ - धर्म में निष्ठा
रण भेरी - रण की भेरी
मदांध - मद से अँधा
हिमाच्छादित - हिम से अच्छादित

द्वन्द समास Dwand Samas

माता - पिता माता और पिता
हास -परिहास हास और परिहास
ज्ञानविज्ञान -ज्ञान और विज्ञान
रंग विरंगी - रंग और विरंगी
जय पराजय - जय और पराजय
भय संदेह - भय और संदेह
नृत्यगान - नृत्य और गान
अस्त्र शास्त्र - अस्त्र और शास्त्र
ऋषि मुनि - ऋषि और मुनि
जीव जंतु - जीव और जंतु
राग द्वेष - राग और द्वेष
सुख दुःख - सुख और दुःख
नदी - नाले - नदी और नाले
पाप - पुण्य - पाप और पुण्य
राजा - प्रजा - राजा और प्रजा
खरा - खोटा - खरा और खोटा



कर्मधारय समास Karmadharaya Samas

सुप्रबंध  - सु + प्रबंध
दुव्यर्वहार - दु: + व्यवहार
नव जीवन  - नव + जीवन
चतुर्दिक - चतुर + दिक्
महारथी - महा + रथी
परमवीर - परम + वीर
मधुरस - मधु + रस
सद्गुण - सत + गुण
दुर्दिन - दु: दिन
अनुचर - अनु + चर
चरणकमल - कमल के समान चरण
कनकलता - कनक के समान लता
प्राणप्रिय - प्राणों से समान प्रिय
महादेव - महान है जो देव
अधमरा - आधा है जो मरा
परमानन्द - परम है जो आनंद




अव्ययीभाव समास  (Abvayi Bhav Samas)

सहर्ष - स + हर्ष
भला बुरा - भला या बुरा
युग संचालक - जो युग का संचालक
प्रतिशोध - प्रति + शोध
प्रतिकार - प्रति + कार
प्रति रक्षण - प्रति + रक्षण
पाप पुण्य - पाप या पुण्य
लाभालाभ - लाभ या अलाभ
यथोचित - यथा + चित
प्रतिउत्तर -प्रति +उत्तर
प्रतिरोध  - प्रति + रोध
प्रतिपक्ष -  प्रति पक्ष
प्रतिकूल - इच्छा के विरुद्ध
भरपेट - पेट भर के
अजन्म - जन्म से लेकर


बहुब्रीहि समास (Bahuvrihi Samas )

करुणा - अयन जो करुणा के अयन है (विष्णु )
लौह पुरुष -लौह सा पुरुष है जो (सरदार पटेल )
कपीश - कापियों में हैं ईश जो (हनुमान)
खगेश - खगों का ईश है जो (गरुण )
गोपाल - गो का पालन करने वाला (कृष्ण)
घनश्याम - घन के समान श्याम (कृष्ण )
चक्रधर - चक्र को जो धारण करता है ( विष्णु )
चक्रपाणी - जिसके हाथ में चक्र हो (विष्णु )
चन्द्रभाल - भाल पर चंद्रमा जिसके है (शिव )
जलज - जल में उत्पन्न होता है ( शिव )
जलद - जल देता है जो (बादल )
नीलाम्बर - नीला का अम्बर जिसका (बलराम )
पीताम्बर - पीला है अम्बर जिसका ( कृष्ण )
मुरलीधर - मुरली को पकडे हुए ( श्रीकृष्ण )
लम्बोदर - लम्बा का उदर जिसका (गणेश )
व्रजायुध - व्रज है आयुध जिसका ( इंद्र )
वीणापाणि - वीणा है जिसके हाथ में (सरस्वती )
दशानन - दस है आनन जिसके (रावण)
महावीर - महान वीर है जो ( हनुमान )
प्रधानमंत्री - मंत्रियों में प्रधान है जो (प्रधानमंत्री )
निशाचर - निशा में विचरण करने वाला (राक्षस )
त्रिलोचन - तीन है लोचन जिसके (भगवन शिव )
पंकज - पंक में पैदा हो जो ( कमल )



द्विगु समास  (DVIGU SAMAS )

कोटिमाथ - कोटि + माथ
पंचवटी - पंच + वती
सप्त ऋषि - सप्त + ऋषि
त्रिभुवन - त्रि + भुवन
चौराहा - चौ + रहा
त्रिलोक - त्रि+ लोक
प्रतिवाद -  प्रति + वाद
नवरात्र - नौ रात्रियों का समूह
पंचमढ़ी - पांच मढ़ीयों का समूह
तिरंगा - तीन रंगों का समूह
दोपहर - दो पहरों का समूह


नत्र समास Natra Samas


अगोचर - न गोचर
अचल - न चल
अजन्मा - न जन्मा
अधर्म - न धर्म
अनंत - न अंत
अनेक - न एक
अनपढ़ - न पढ़
अनभिज्ञ - न अभिज्ञ
अन्याय - न न्याय
अनुचित - न उचित
अपवित्र - न पवित्र
अलौकिक - न लौकिक




एक टिप्पणी भेजें

  1. उत्तर
    1. देेेेश्‍ा के ि‍लए भक्‍ि‍त तत्‍पुरूष समास

      हटाएं
    2. tatpurush - desh ke liye bhakti

      हटाएं
  2. देशभक्ति में कोनसा सामस है

    उत्तर देंहटाएं
  3. Swarnabhushan ka vighraha kya hoga?

    उत्तर देंहटाएं
  4. Mahakaleshwar samas vigraha?!!

    उत्तर देंहटाएं
  5. नौजवान का समास विग्रह

    उत्तर देंहटाएं
  6. क्रीड़ा क्षेत्र ka samas vigrah

    उत्तर देंहटाएं
  7. Thank you so much this is represented beautiful

    उत्तर देंहटाएं
  8. Prathveemata me konsa samas h ba iska vigray kya hoga

    उत्तर देंहटाएं
  9. अवयव में कौन सा समास है

    उत्तर देंहटाएं
  10. अनुसंधान कार्य का समास विग्रह क्या होगा।

    उत्तर देंहटाएं

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top