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मोहनदास 

जानते हो मोहनदास
तडप तडप कर मर रही हूं मैं अंदर से
और जल रही हूं बाहर से भी
इतिश्री सिंह राठौर
इतिश्री सिंह राठौर
एेसा लग रहा है कि
हलक के रास्ते हाथ डालकर कोई अंतड़ियों तक पहुंच गया है
ऐसा लग रहा है कि प्राइवेट पार्टस में कोई सरंकडा चूभो रहा है
ऐसा लग रहा  कि किसी ने हेमदस्ते से मेरे कलेजे को कूट दिया है
एेसा लग रहा है कि किसीने स्तनों के टुकड़े टुकड़े कर दिए हैं
एेसा लग रहा है कि होठों को कोई खींच खींच कर खा रहा है
एेसा लग रहा है कि कोई जबरन मेरी आंखे बाहर निकाल रहा है
एेसा लग रहा है कि मेरे कानों को किसीने कसाई के हत्थे चढ़ा दिए हैॆं
एेसा लग रहा है कि मेरी नाक पर  ईंट रख कर कोई सांसे रोक रहा है
एेसा लग रहा है कि कंडे की अग्यारी बनाकर कोई मेरे गालों को झूलसा रहा है
एेसा लग रहा है कि मेरे गले को किसीने भूखे मगरमच्छों के हवाले कर दिया है
एेसा लग रहा है कि मेरे पेट को  सैकड़ों चूहें कूतर रहे हैं
एेसा लग रहा है कि मेरे दिल को जोर से पकड़ कर कोई कैंची से काट रहा है
सच बताऊं मोहनदास
मेरे शरीर का हर हिस्सा
ट्रेन के नीचे आकर बेरहमी से
कटना चाहते हैं
क्यों न लगे एेसा मुझे
क्यों नफरत न करूं मैं खुदसे
यह सुनने के बाद भी कि
एक पिता ने अपनी 10साल की बच्ची
का बलात्कार के बाद
कर दी  हत्या


इतिश्री सिंह राठौर (श्री) जी, कथाकार व उपन्यासकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। वर्तमान में आप हिंदी दैनिक नवभारत के साथ जुड़ी हुई हैं. दैनिक हिंदी देशबंधु के लिए कईं लेख लिखे , इसके अलावा इतिश्री जी ने 50 भारतीय प्रख्यात व्यंग्य चित्रकर के तहत 50 कार्टूनिस्टों जीवनी पर लिखे लेखों का अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद किया. आप,अमीर खुसरों तथा मंटों की रचनाओं के काफी प्रभावित हैं.

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