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 मईया अब तुम ही समझाओ


मईया अब तुम ही समझाओ
मन में प्रश्न अखरता है।
रात होते ही चंदा क्यों 
मईया
मेरा पीछा करता है।
मैं जो चलूँ तो चलने लगता
रुक जाऊँ तो रुक जाता है।
मैं जो हँसू तो हँसने लगता
शरमाऊँ तो शरमाता है।
मईया बोली सुन रे बेटा,
इसमें नहीं दुराहा है।
वैसे भी चंदा तो बेटा 
लगता तेरा मामा है।
जैसे भौरा रस की खातिर
फूलों पर मंडराता है।
अम्बर अवनी को बाँहों में
भरने को हाथ बढ़ाता है।
वैसे ही चंदा भी तुझपर 
अपना प्यार लुटाता है।
इसी लिए वह हर पल
तेरे पीछे पीछे आता है।

-अभिषेक कुमार अम्बर

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