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स्वभाव 

"महाराज ,मैं अब इन आत्माओं  को नहीं सम्भाल सकता !"
बहुत बवाल करती हैं ।
नेता जी
क्या हुआ ? -- स्वर्ग में आत्माओं का विभाग देखने वाले  प्रधान सेवक ने यमराज से कहा  ।
एक किसी वामपंथी  की आत्मा है --"सारा दिन क्रांति -क्रांति करती है ! उससे प्रभावित  हो कर सारी आत्माएं धरने पर बैठ रही थीं ।बड़ी मुश्किल से समझाया ।"
किसी दक्षिण पंथी की आत्मा है -" खुद को बड़ा राष्टवादी कहती है ! कोई ज़रा सा कुछ कह दे तो उसे  पाकिस्तान भेजने को उतावली  हो उठती है !"
कुछ स्त्रियों  की आत्माएं हैं ! इन्हें मर कर भी  चैन नहीं  ।
ज़रा देखिए इनकी बातें ----
" हाय नीली  ड्रेस बड़ी हॉट लगती है ।उस सीरियल में  हीरोइन की नीली साड़ी गज़ब थी ।"
" हां हां ठीक थी ।मैं वो सीरियल कम देखती थी ।मेरी सास का फ़ेवरिट था !इसलिए मेरा तो हो नहीं सका !"
" अरे मेरी सास हर चीज़ की नकल करती थी ।मेरी नेलपॉलिश ,मेकअप ,पर्स सब पर नज़र थी उसकी !"
"मेरी सास तो मुझसे भी ज़्यादा पार्लर जाती थी !"
सासों  की आत्माएं कहाँ पीछे हैं ----
" मैं तो बहुत पूजा पाठ करती थी ,हर दूसरे दिन व्रत मेरा नियम था ।किसी को कुछ न कहती थी ।न कभी बहु से  दहेज मांगा ,न उसे बेटा पैदा करने को कहा !"
" रहने  दो  गीता की आत्मा --मैं तुम्हारे ही मोहल्ले में रहती थी ।सब जानती हूं तुम्हारी करतूतें ! सत्संग में सबकी चुगलियां  करना तुम्हारी पूजा थी ! व्रत में ठूस ठूस कर फल खाना सब पता है ।और जो बहु को लम्बी गाड़ी के  लिए एक बार घर से निकाला था ! एक पोती के बाद चुपचाप दूसरे शहर जा कर बहु का  गर्भपात  कराया !---सारा मोहल्ला जानता था तुम्हारे कर्म !"
"हां हां तुम तो शुरू से ही मुझसे जलती थी " 
" दे मुक्का , बाल पकड़ कर गुथमगुथा " ---महाराज बड़ी मुश्किल से इन सास आत्माओं को अलग किया ।
इनके अलावा और नमूने देखिए ---
"  सरकारी अफसर की आत्मा है - जब तक  किसी चीज़ पर वजन न रखो ! सीधे मुंह बात न करती !"
" वकील की आत्मा आप पर ही केस करने को उतावली है " 
" ट्रक ड्राइवर की आत्मा ज़ोर ज़ोर से कान फाडू पंजाबी गाने बजाती है "!
" ठेकेदार ,सी ए , इंजीनियर  इन सबकी आत्माएं रिश्वत ,भ्र्ष्टाचार के अलावा और किसी मुद्दे पर बात ही न करतीं "!
" एक पत्रकार जी की आत्मा  तो जहां  फायदा देखती है -उस पक्ष का  गुणगान गाने लगती है !"
" कुछ शिक्षकों की आत्माओं को  तो ट्यूशन की महिमा गाने से फुर्सत नहीं है ।हां एक हिंदी  शिक्षक की आत्मा एक कोने में पड़ी रहती है ,उसे कोई नहीं पूछता ।"
" कुछ प्रकाशको की आत्माएं यहां भी  सहयोग राशि पा जाने का सपना देख रही हैं । साहित्यकारों की आत्माएं फंसती दिख रही हैं ।ये बात  ओर है कि उनकी रचनाएँ  क्या है ? ये वो स्वयम्भू लेखक भी न समझ पाएंगे "!
महाराज ने सारी रामकहानी सुनी --" सुनो सेवक , एक नेता जी मर कर आ रहे हैं ।शायद वो स्थिति सम्भाल पाए "।
आइए नेता जी आपकी आत्मा का स्वागत है -- "क्या आप सभी आत्माओं  को कंट्रोल कर पाएंगे ?"
हा हा !नेता जी ज़ोर से हंसे " मेरी आत्मा ! वो तो मैंने कबकी बेच दी "!!!

डॉ  संगीता गांधी 
नई दिल्ली

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