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प्यार का नशा

प्यार का नशा, दिलदार का नशा
मदहोश हो गये हैं, हमें होश में न ला।
प्यार का नशा..............................।
प्यार का नशा

तन्हाई का ये आलम, ये प्यार भरी बातें
इकरार भरी बातें, ऐतबार भरी बातें
ऐ पल यहीं ठहर जा अब लौट के न जा।
मदहोश हो .....................................।

जिंदगी है छोटी, जी भर के इसे जी लें
मेरे रंजो-गम तू ले ले, हम अश्क तेरे पी लें
कब शाम ढल ये जाये, बुझ जाये कब दिया।
मदहोश हो .....................................................।

महके हुए नजारे, बहकी हुई फिजा
कुदरत का ये असर है या प्यार क धुआं
सुध-बुध हैं भूल बैठे, अब जायें हम कहां।
मदहोश हो ...........................................।

- तरु श्रीवास्तव



यह रचना तरु श्रीवास्तव जी द्वारा लिखी गयी है . आप कविता, कहानी, व्यंग्य आदि साहित्य की विभिन्न विधाओं में लेखन कार्य करती हैं . आप पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्ष 2000 से कार्यरत हैं। हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, अमर उजाला, हरिभूमि, कादिम्बिनी आदि पत्र-पत्रिकाओं में बतौर स्वतंत्र पत्रकार विभिन्न विषयों पर कई आलेख प्रकाशित। हरिभूमि में एक कविता प्रकाशित। दैनिक भास्कर की पत्रिका भास्कर लक्ष्य में 5 वर्षों से अधिक समय तक बतौर एडिटोरियल एसोसिएट कार्य किया। तत्पश्चात हरिभूमि में दो से अधिक वर्षों तक उपसंपादक के पद पर कार्य किया। वर्तमान में आप ,प्रभात खबर समाचारपत्र में कार्यरत हैं.आकाशवाणी के विज्ञान प्रभाग के लिए कई बार विज्ञान समाचार का वाचन यानी साइंस न्यूज रीडिंग किया।

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