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चुगली का महासम्राज्य

वाह! चुगली तेरा महासम्राज्य
पूजा
पूजा
गली कूचों से लेकर
महलों तक तू निवास करती है !
नहीं बचा धरती का कोई कोना
जहाँ न हो तेरा होना!
हम कितने भी सभ्य हो जाये
पर तू रहेगी हमारी निशानी 
तेरी महिमा वेद पुराण पर भी न जाये बखानी!
हर घर दफ्तर में तू है
राजनीति की जान ही तू है
सास बहू का रिश्ता तेरे बिन अधूरा
तुझ बिन  जो होता नहीं पूरा !
जो  जितना तुझमें माहिर
वो उतना ही जग जाहिर
बीज तेरा धरती पर लाकर किसने बो दिया
पल में बुद्धिमान ने भी बुद्धि को खो दिया!
दोस्तों में भी लड़ाई तू करवा देती है
बचपन की दोस्ती एक क्षण में 
.............तू  तोड़ देती है!
सच में तेरे झूठ की बू रहती है
हृदय में तेरे एक आग सुलगती रहती है
स्वयं जलकर ख़ाक नहीं हुई आज तक
पर दूसरों को ख़ाक कर जाती है!

                        
पूजा
रुचि-हिन्दी और बांग्ला साहित्य पढ़ना,लेखन कार्य
पता-बेहट,सहारनपुर(उत्तर प्रदेश)
शैक्षिक योग्यता- शिक्षा स्नातक और परास्नातक

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