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तुमसे दूर होकर

कितना परेशान करती थी न मैं तुम्हें,
और तुम भी कुछ कम हैरान न करते थे मुझे !
सब याद है मुझे
मेरे सो जाने पर जब तुम मेरी चोटी बांध देते थे पलंग से
और उठते ही चिल्ला चिल्ला कर रोती थी मैं,
मुझे डराने के लिए कैसे तुम 
इतिश्री सिंह
इतिश्री सिंह
नकली छिपकली फेंकते थे मुझ पर 
और डर से घर के अंदर ही न जाती थी मैं,
कैसे तुम्हें डांट खिलाने के लिए
मां के सामने झूठमूट रोती मैं,
सब याद है मुझे,
और वो दिन भी याद है 
जब क्रिकेट खेलते वक्त 
गलती से तुम्हारी गेंद लग गई थी मुझे
और होंठ फट गए थे मेरे,
मेरी हालत देख कर  कितना घबरा गए थे तुम
उस दिन मां से तुम्हें कितनी मार पड़ी थी
तुम्हारी गलती न होने के बावजूद,
और
बाबूजी ने तो तुम्हें बोर्डिंग स्कूल भेजने का फैसला कर लिया 
क्योंकि उन्हें लगता था कि 
मैं और तुम साथ नहीं रह सकते,
सच कहूं, तो मैं परेशान होना चाहती हूं
लेकिन तुम क्यों  अब परेशान 
नहीं करते मुझे ?
सच कहूं, तो उस दिन  गेंद लगने पर
मुझे उतना दर्द नहीं हुआ
जितना की आज होता है
तुमसे दूर होकर 'भैया'...
                           -    इतिश्री सिंह राठौर(श्री)


इतिश्री सिंह राठौर (श्री) जी, कथाकार व उपन्यासकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। वर्तमान में आप हिंदी दैनिक नवभारत के साथ जुड़ी हुई हैं. दैनिक हिंदी देशबंधु के लिए कईं लेख लिखे , इसके अलावा इतिश्री जी ने 50 भारतीय प्रख्यात व्यंग्य चित्रकर के तहत 50 कार्टूनिस्टों जीवनी पर लिखे लेखों का अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद किया. आप,अमीर खुसरों तथा मंटों की रचनाओं के काफी प्रभावित हैं.

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