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शौर्य गाथा

सिर कट जाये खौफ नही।
सांसें थम जायें खौफ नही।
हम जो भी करने आये है।
कर ही जायेंगे खौफ नही।।
अभिनव कुमार त्रिपाठी
अभिनव कुमार त्रिपाठी          
        हम गोली गोला सह लेंगे।
        हम खून से लतपत रह लेंगे।
        धरती माँ के इस आँचल को।
        अपने सीनो से ढक लेंगे।।
हमें याद है एक वो दिन थे।
जब धूप भयंकर पड़ती थी।
तब माँ अपने आँचल से ।
मेरे बदन को ढकती थी।।
        अब आज हमें कुछ करना है।
        माँ की रक्षा करने आये।
        इन गोली गोलों का हम आज ।
        मुँह तोड़ जवाब देने आये।।
वो एक मारे हम माफ़ किये।
दूजा मारे हम शांत रहे ।
तीजा मारा तो इन्साफ किया।
घर में घुसकर सब साफ़ किया।।
        वो करते चोरी चुपके थे।
        हम सीना ठोक के कर आये।
        उनके ही भाषा में उनको।
        मुँह तोड़ जवाब है दे आये। 
कब तक सहते रहते उनको।
हम कब तक उनको माफ़ करे।
माफ़ करने की भी सीमा है।
कब तक उनको बर्दास्त करें।।
        बहुत किया उपद्रव जब उन्होंने।
        तभी हमने इन्साफ किया।
        उखाड़ फेका उनको वहां से।
        काँटों भरा रास्ता साफ़ किया।।
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Written by-
अभिनव कुमार त्रिपाठी                                                                    
(बी.पी. एड., बी.टी.सी.
ग्राम- मोहम्मदपुर राजा ,        
पोस्ट - इकौना,जिला- श्रावस्ती
Email- abhinav.rvn@gmail.com
फोन-8948112345 

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  1. शाबास !! दिल खुश हो गया मेरे प्यारे ये शौर्य गाथा अपने आप में देश प्रेम और समर्पण को दर्शाता है ।। जोश और उमंग से भर दिया इस काव्य ने

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