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सात पन्ने


मौत की किताब है - " जिन्दगी "
सांसों के सात पन्ने
चार दिनों के वक्त में 
कोई भी इसको पढ़ ले
पांचवां दिन ना मिलेगा
जिन्दगी
युग चाहे कितने बदल ले

उम्र के सफर में
सांसों से लड़ रहा है
छीन लूं मैं किसकी तारें
वक्त सोच रहा है

देने मौत को सांसें
तड़प रही है जिन्दगी भी
शमशान की डगर पे
हर  पल द्वंद चल रहा है

जीवन की किताब में
होते चार भाग हैं
अंतिम पन्ने में मिलता 
सिर्फ मौत का हिसाब है
खून की स्याही से 
लिखा जहाँ हर जवाब है

सात दिन से ज्यादा
मिलते नहीं यहाँ पन्ने
चार दिन के वक्त में
पढ़ ले कोई सम्भल के
जिन्दगी के सफर में हमसफर
बस मौत की किताब है
राजेश गोसाईं
**********

2......* * जिन्दगी * *

जिन्दगी तो 
             एक कहानी है
आँखों में समन्दर
             आशाओं का पानी है

नदिया की धारा में
           दुख सुख ही किनारा है

सिर्फ प्यार ही सहारा है
           यह नग्मा प्यारा है

तमन्ना की उड़ानों में
          सपनों की जवानी है

जिन्दगी तो 
           एक कहानी है
आँखों में समन्दर 
         आशाओं का पानी है

मर कर भी जी जाये
       जी कर भी मर जाती है

हंस कर भी रोना है
         रो कर भी मुस्काती है

अश्कों की लहरों पे
        मौजों की रवानी है

जिन्दगी तो 
         एक कहानी है
आँखों में समन्दर
        आशाओं का पानी है

संसार की बगिया है
        फूलों संग काटें हैं

हवाओं का घेरा है 
        परिन्दों का डेरा है

पत्ता पत्ता गिरना है
         खुश्बु यह पुरानी है

जीवन की रीत यही
         ऋतु फिर आनी है

जिन्दगी तो
          एक कहानी है
आँखों में समन्दर
          आशाओं का पानी है
* *राजेश गोसाईं * *
***********

3......दुनिया

कब तक चलेगी
झूठी ये दुनिया
रस्मों रिवाजों में लिपटी
ढोंग पाखण्डों की दुनिया
कब तक चलेगी
मृगतृष्ना सी ये दुनिया

स्वार्थों के जाल में
जकड़ी हुई
लालच लोभ की
मकड़ी यही
कब तक चलेगी
इंसां को इंसां से
डसती ये दुनिया

ममता प्यार की मतलबी
पैसों में बिकती है यही
कब तक चलेगी
जेबों की सांसों पे 
घुटती ये दुनिया

पूछती है दुनिया 
दुनिया से यही
हंसते चेहरों के पीछे
गम छुपाती ये दुनिया

पत्थर की नगरी में
पत्थरों को मनाती
दिल के कस्बों में
दिल को जलाती
कब तक चलेगी
रूहों तक तड़पाती ये दुनिया

सवालों पे सवाल लिये
सुनहरे ख्वाबों पे
मलाल लिये
टूटी नींद की खुमारी सी
कब तक चलेगी
अंतहीन रंगीन ये दुनिया
\\राजेश गोसाईं //
**********

4....दुनियादारी

झूठी दुनिया ने क्या क्या रंग बदला है
ए मौत-  तुझसे मिल के सब पता चला है
-………..........
एक दिन मैने सोचा
क्या होता है मरने के बाद
कौन क्या करता है 
कौन कितना रखता है मुझे याद
यह सोच कर मर गया हूँ मैं आज
देखने को दुनिया का असली राज

एक तरफ मैं मरा हुआ था
रिश्ते नातों से घिरा हुआ था
चारो तरफ रोते रिश्तेदारों में
रोना धोना मचा हुआ था
सूनी मांग कलाई में 
राजेश गोसाईं
राजेश गोसाईं
बीवी ने पकड़ा कोना था
मेरी माँ का हाल बुरा तो
और भी ज्यादा होना था
बाप की आँखे पथरा गई
मौत मेरा लाल खा गई
ढेर कफन ओढ़ कर
गली मौहल्ले के लोगों संग
मैं आँगन में पड़ा हुआ था

उधर समाज के लोगो का हौंसला
मेरे परिवार को मिल चला
कुछ लोगो को फिर भी चैन ना मिला
जल्दी ले चलो वापिस दूर भी जाना है
एक आवाज आई बच्चो को भी लाना है
देर हो रही दफ्तर को और काम बहुत है
किसी पार्टी शादी और मॉल भी जाना है
बदबू मेरी से कोई दूर भी खड़ा हुआ था

मंत्री जी ने हंस कर सबसे हाथ मिलाया
हौंसला दे मेरी बीवी को गले लगाया
बूढी माँ से हाथ जोड़ एक तरफ हो गये
पार्टी वाद ले कर राजनीति में खो गये
देख कर सारा हाल मैं
मजबूर वहाँ पर धरा हुआ था

कन्धे बदल रहे थे 
देने वाले मुझको सहारा
जिन्दगी भर जो कर रहे थे
मेरे से किनारा
मकान से श्मशान गेट
ऐसे मौके पे क्रिकेट
ठहाके उनके देख
मैं भी घृणा से भरा हुआ था

हैरान तो मै और भी हुआ
जब घर ने वसीयत को छुआ
कर रहे थे मेरे बाप भाई
एक पानीपत की लडाई
बीवी कहती हक है मेरा
बच्चे बन गये कसाई
दिवार पे तस्वीर बन
मैं परिवार की दिवार बना हुआ था

झूठी दुनिया की देखी
झूठी दुनियादारी है
पैसा धर्म पैसा ईमान 
पैसे की सब यारी है
मतलब  स्वार्थ की रह गई 
दिल के रिश्तों में बह गई
सिक्कों की रिश्तेदारी है
रंग बदलती दुनिया में बेरंग
घमासान यह श्मशान तक
मौत से पहले की मौत में
जी रही दुनिया सारी है

राजेश गोसाईं
******

5.* *कारवां

जिन्दगी के चन्द लम्हों का कारवां
बढ़ता ही जाता है
आगे.....और आगे.....जैसे
कोई सजा हुआ जनाजा
और पीछे चलता...
शोकाकुल लोगों का यह
छोटा या बड़ा कारवां
या फिर कहीं किसी
शब ए बारात में गुल
इक शोर में डूबा 
यह यह गम विहीन कारवां

यह जिन्दगी का काफिला
लगता है कहीं हसीन
तो कभी नासुर दर्द भरा
यह कारवां तो देगा छोड़
एक नया सा सलौना सा गुबार
जहाँ होगा कहीं हमारा
खुशी का आलम
या फिर होगा
गम का सिसकता
साज सा बजता यह कारवां
कभी कांटों के दामन में
लिपटा होगा यह
तो कभी ....पुष्प अम्बार लिये
इक ताज सा होगा
यह कारवां

राजेश गोसाईं

*******

6...मौत की वसीयत

जिन्दगी की किताब के
आखरी पन्ने पर लिखा होता है
***** मौत****
काम कुछ ऐसे कर जायें 
किताब ये खत्म ही न  होने पाये
और *** जिन्दगी** दे जाये
** मौत**

मुझे पढ़ लेना कोई आज
मुझे रख लेना कोई याद
मेरी मौत के बाद

कौन होगा जो मेरे 
पार्थिव शरीर पर दो आँसु
कीमती बहायेगा
कौन होगा जोे मेरी
अंतिम यात्रा में मेरे संग
मुझे कन्धे पे ले जायेगा
मुखाग्नि देगा      कौन
मेरी मौत के बाद

प्रार्थना है मेरी
मात पिता - भाई बन्धु सबसे
मेरी अंतिम इच्छा ये लेना मान
किसी जरूरतमंद को 
कर देना मेरे अंगदान
चिकित्साल्य में किसी परिक्षक के
परिक्षण में या परशिक्षण में
कर देना मेरा शवदान
ना जलाना किसी अग्नि में
ना बहाना कहीं जल में
ना दफनाना भूगर्भ में कहीं
मेरी आँखे रखेंगी जिन्दा  मुझे
मेरी मौत के बाद

अस्थि राख चुटकी भर
उठा कर रख देना
लहराये तिरंगा जहाँ
जय हिन्द कह देना  इक बार
मेरी मौत के बाद

रचना : राजेश गोसा

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