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माँ पर मुक्तक

न पूजा  न अरदास करता हूँ।
माँ तेरे चरणों में निवास करता हूँ।
औरों लिए तू सब कुछ दे दे।
माँ
माँ 
मैं तेरी मुस्कान की आस करता हूँ।

तेरा हर आंसू दर्द का समंदर है।
माँ बक्श दे मुझे जो दर्द अंदर है।
यूँ न रो अपने बेटे के सामने।
तेरा आँचल मेरे लिए कलंदर है।

माँ तू क्यों रोती है मैं हूँ ना।
तुझको जन्नत के बदले भी मैं दूँ ना।
तेरी हर सांस महकती मुझ मैं।
तेरे लिए प्राण त्याग दूँ ना।

तू गीता सी पवित्र है।
तू सीता का चरित्र है।
तुझ में चारों धाम विराजे।
तू मेरी अनन्य मित्र है।

तू रेवा की निर्मल धारा।
गंगा का तू मोक्ष किनारा।
तेरे चरणों में है ईश्वर।
तू मेरा जीवन उजियारा।

आंसू गिरे आँख से तेरे।
धिक्कार उठे जन्मों को मेरे।
मत रो माँ तू अब चुप हो जा।
शीश समर्पित चरण में तेरे।

माँ सावन की फुहार है।
माँ ममता की गुहार है।
माँ तेरे महके आँचल में।
हम बच्चों की बहार है।

तेरी ममता काशी जैसी।
बिन तेरे ये धरती कैसी।
तेरे हर आंसू की कीमत।
मेरे सौ जन्मों के जैसी।

यह रचना सुशील कुमार शर्मा जी द्वारा लिखी गयी है . आप व्यवहारिक भूगर्भ शास्त्र और अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक हैं। इसके साथ ही आपने बी.एड. की उपाध‍ि भी प्राप्त की है। आप वर्तमान में शासकीय आदर्श उच्च माध्य विद्यालय, गाडरवारा, मध्य प्रदेश में वरिष्ठ अध्यापक (अंग्रेजी) के पद पर कार्यरत हैं। आप एक उत्कृष्ट शिक्षा शास्त्री के आलावा सामाजिक एवं वैज्ञानिक मुद्दों पर चिंतन करने वाले लेखक के रूप में जाने जाते हैं| अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में शिक्षा से सम्बंधित आलेख प्रकाशित होते रहे हैं | अापकी रचनाएं समय-समय पर देशबंधु पत्र ,साईंटिफिक वर्ल्ड ,हिंदी वर्ल्ड, साहित्य शिल्पी ,रचना कार ,काव्यसागर, स्वर्गविभा एवं अन्य  वेबसाइटो पर एवं विभ‍िन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाश‍ित हो चुकी हैं।आपको विभिन्न सम्मानों से पुरुष्कृत किया जा चुका है जिनमे प्रमुख हैं :-
 1.विपिन जोशी रास्ट्रीय शिक्षक सम्मान "द्रोणाचार्य "सम्मान  2012
 2.उर्स कमेटी गाडरवारा द्वारा सद्भावना सम्मान 2007
 3.कुष्ट रोग उन्मूलन के लिए नरसिंहपुर जिला द्वारा सम्मान 2002
 4.नशामुक्ति अभियान के लिए सम्मानित 2009
इसके आलावा आप पर्यावरण ,विज्ञान, शिक्षा एवं समाज  के सरोकारों पर नियमित लेखन कर रहे हैं |

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  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विश्व पृथ्वी दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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