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सफाई 

डॉ संगीता गांधी
डॉ संगीता गांधी
बचपन से निशा को दो ही चीजों का शौक था ।एक सफाई का ,दूसरा  फूल ,मयूर पंख  सहेज कर रखने का । उसकी अलमारी ,किताबों में सूखे फूल ,मयूर पंख  इनका एक सुंदर संग्रह संकलित हो  चुका था ।  बड़ी कलात्मकता से उसने  इन्हें  सजा कर रखा था ।
चीजें संग्रह करने की आदत से तो किसी को कोई  परेशानी नहीं थी पर उसकी सफाई की आदत कभी कभी सबको परेशान कर देती थी । निशा  को एक तिनका भी दिख जाता तो खाना -पीना छोड़ सफाई करने लगती ।माँ  ,भैया कई बार टोकते इतनी सफाई न किया करो पर निशा  मानती ही न थी ।शादी के बाद  ससुराल आयी ।अच्छा परिवार था ।निशा बहुत खुश थी ।ससुराल वाले भी निशा से प्रसन्न थे ।
सब कहते बहु बहुत सुघड़ है ।घर कितना साफ़.सुथरा रखती है ।
फिर एक बेटी हुई ।पहली बेटी थी---सबने ख़ुशी मनाई ।लक्ष्मी आई है ।
दोबारा गर्भवती हुई !.अब पति ,सास .ससुर कुछ कानाफूसी करने लगे ।
बात उसके कानों में भी पड़ी ....अबकी बार लड़का होना चाहिए !
सास ...एक दिन एक छोटे शहर ले गयी ।उसे नहीं पता था क्यों?
वहां एक डॉक्टर के क्लिनिक में थी ।ज्ञात हुआ "test" होगा ।
अब बात समझ आई। उनके बड़े शहर में यह " test" कराना मुश्किल था ।
पकडे जाने का डर था ।टेस्ट हुआ .....डॉ ने "लड़की " बताई !
सास का पारा 'high' हो चुका था ।उसने तुरंत फैसला किया ....."सफाई" कराएँगे !
निशा  चुप थी ....आज वो नहीं चाहती थी " सफाई " हो ।
आज उसने निर्णय किया ....ये " सफाई " नहीं होगी ।
जानती थी ...ये निर्णय उसकी शादीशुदा ज़िन्दगी बर्बाद कर देगा ।
पर वो अडिग थी .....एक पत्नी से पहले वो एक " स्त्री " है ....इसलिए एक " स्त्री" की जान नहीं लेगी ।
आज उसने अपनी बचपन की " सफाई " की आदत से मुक्ति का फैसला किया ।
वो अपनी दोनों बेटियों के साथ ....अकेलेपन की " गन्दगी " में रह लेगी ।
पर " सफाई " नहीं होगी । उसकी बेटियां " मयूर पंख " सी हैं जिन्हें वो बड़ी सुरक्षा और कलात्मकता से सहेजेगी । 
डॉ संगीता गांधी
अध्यपिका और सामाजिक कार्यकर्ता 

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