0
Advertisement

जरूरत नहीं

सीमा घर का काम निबटा कर बैठी ही थी की अचानक फोन बजा ! कौन होगा ? सोच कर सीमा ने फोन उठाया
डॉ संगीता गांधी
डॉ संगीता गांधी 
। एक चीख के साथ वो सोफे पर गिर गयी ।...भाई ने पिता के देहांत की  सूचना दी थी ।सीमा ने खुद को संभाला तुरंत पति को  सूचना दी ।बेटे मंथन को सास के पास छोड़ा ।
सीमा अपने पति के साथ रात की गाड़ी से आगरा पहुंची जहां उसका मायका था ।घर के कोहराम में दो दिन गुज़र गए ।पति  संस्कार के बाद लौट गए और सीमा तेरहवी के लिए रुक गयी ।
सीमा तेरा फोन है ! अफ़सोस पर बैठी सीमा को दीदी ने आवाज़ दी । सीमा ने फोन लिया .....मम्मी वापिस आ जाओ , मुझे दादी के पास नहीं रहना  मंथन रोये जा रहा था ।सीमा ने समझाया - बेटा नाना जी  डेथ के कारण मैं यहां हूँ जल्दी आ जाउंगी ।मंथन और ज़ोर से रोने लगा ,वो किसी तरह  मान नहीं रहा था ।सीमा ने मां से बात की .....मैं अभी चली जाती हूँ। तेरहवी से एक दिन पहले फिर आ जाउंगी ।मंथन को मेरी " जरुरत " है ।
25 साल गुज़र चुके हैं ।मंथन अमेरिका में है ।पत्नी भी वहीँ है ।सीमा को जब से पता चला की बहू मां बनने वाली है ,उसके पाँव ज़मीन पर नहीं पड़ रहे ।बहु का सातवां महीना है ...इस समय इसे विशेष देखभाल की जरूरत है ....ये सोचकर उसने बेटे को फोन किया ।.
मंथन -बेटा टिकट  भिजवा दे और वीसा का अरेंजमेंट हम कर लेंगे ,बहु को मेरी जरूरत है ।
मां -तुम भी क्या बेकार की  पुराने ज़माने की बातें करती हो ।यहां अमेरिका में medical facilities बहुत अच्छी है ।तुम्हारी कोई " जरूरत " नहीं है ! और हाँ बेकार फोन करके मुझे disturb न किया करो ।मंथन ने  फोन काट दिया ।सीमा की अब किसी को " जरूरत " नहीं ।


लेखिका -डॉ संगीता गांधी 
एम् फिल -
पीएचडी - 

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top