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तुम्हारे जाने के बाद

तुम्हारे जाने के बाद
तुम्हारे जाने के बाद
आँखों पे अक्सर काला चश्मा लगाये रहता हूँ
ताकि छुपा सकूँ
इन आँखों की उदासी
ताकि कोई नजर मिलाकर
 तुम्हे पहचानने की कोशिश ना करे
 इन आँखों में

तुम्हारे जाने के बाद 
हस देता हूं अक्सर 
विला वजह, वेबात
रूखी सी महफ़िलो में
ताकि कोई झाँक ना सके 
मेरे अंदर जहाँ अब 
गहरा सन्नाटा पसरा है बस

तुम्हारे जाने के बाद
अक्सर लोगो को सुझाता हूँ जीने का कायदा 
डरता हूँ कहीँ फूट ना  पडू कि
कितना बेकायदा हो चुका हूँ में

तुम्हारे जाने के बाद 
खूब ही खुश रहता हूँ मै 
उधारी की ये ख़ुशी मुझे 
और डुबाये जाती है तुम्हारे कर्ज में

तुम्हारे जाने के बाद 
अब वो हो गया हूँ 
जो कभी था ही नहीं मै 
डरता हूँ 
कोई इल्ज़ाम ना लगा दे तुम पर 
मेरे टूटने का

तुम्हारे जाने के बाद 
ये चश्मा 
ये कायदा 
ये ख़ुशी 
बस तुम्हारे लिये है 
पर तुम हो ही नहीं अब 
नहीं हो कही।


यह रचना पुष्पेन्द्र कुमार खण्डेलवाल जी द्वारा लिखी गयी है . आप वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन कार्य में रत है .  संपर्क सूत्र - पता : - ११८/४४, अग्रवाल फार्म, मानसरोवर, जयपुर, मो. : - ९००१८८९९११

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