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सारा आकाश की नायिका प्रभा

सारा आकाश उपन्यास की नायिका प्रभा पढ़ी लिखी ,सभ्य ,सुसंस्कार ग्रस्त स्त्री है . अध्ययन काल में वह अपने सहेलियों के बीच रंग -विरंगी कल्पनाओं के स्वप्न संजोती हैं . परन्तु गृहस्थी में पड़ते ही वह अपने जीवन को व्यावहारिक और समाज के अनुकूल बना लेती है . शिक्षित होने के कारण विषम और विरोधी हालातों में भी वह अपना साहस नहीं खोती और विवेक तथा बुद्धि के साथ संघर्षरत रहती है . पत्नी के रूप में भी वह भारतीय आदर्श को प्रस्तुत करती है . सुन्दरता तथा शिक्षा ही उसके प्रमुख गुण हैं . सुन्दरता के बीच उसकी हँसी समर को बड़ी ही सुन्दर प्रतीत होती है .समर उससे न बोलकर भी उसकी सुन्दरता की डोर में बंधा हुआ है . 
उपन्यास सारा आकाश में प्रभा के चरित्र में निम्नलिखित विशेषताएँ निहित हैं :- 

१. स्वप्न दृष्टा एवं कल्पनाशील नारी :- 

प्रभा
विद्यार्थी जीवन में प्रभा अपनी सखियों के मध्य स्वप्न दृष्टा दिखाई पड़ती है . उसके स्वप्न विविध प्रकार के हैं :-
  • कुँवारे जीवन का स्वप्न - "शादी नहीं करेगी .खूब पढ़ लिखकर गाँवों में चली जायेगी और वहाँ स्त्रीयों को पढाया करेगी .कभी सोचती थोडा सा सामान लेकर सारे हिंदुस्तान का पैदल टूर करगी ,खूब विस्तार से अपनी डायरी लिखा करेगी. "
  • पति और गृहस्थी का स्वप्न -  "मेरा पति तो प्रोफेसर होगा ,अफसर होगा ,किसी बड़ी कंपनी में मैनेजर होगा .हम और वह केवल दो प्राणी होंगे .खूब लम्बी चौड़ी एकदम नए ढंग की कोठी होगी ....तीन चार नौकर .सुबह ये बड़े प्रेम से उठाएंगे मेरी देर से सोने आदत पर बुरा भला कहेंगे चाय पीते -पीते हँसते - हँसते ,अखबार पढ़ते - पढ़ते सारा समय निकल जाएगा .

२. करुणा की मूर्ति - 

प्रभा का जीवन करुणा की मूर्ति है . वह समाज कि निर्दोष अपराधिनी से विवाह करने से भागने वाले पति से विवाह कर दी जाती है .ऐसा पति उसे मिला है जो उसे स्पर्श से भी घृणा करता है .भोजन में नमक अधिक होने पर जो ठोकर मार कर थाल उलट देता है .उज्ज्वल चरित्र की होकर भी सास द्वारा जो चरित्रहीन कही जाती है .मकान की छत पर जाना भी उसके लिए अभिशाप बन जाता है . 

३. नम्रता और सहनशीलता की मूर्ति - 

शिक्षित होने के कारण प्रभा अत्यधिक विनम्र तथा सहनशील नारी है . वह अपना भला बुरा भली प्रकार पहचानती है . ससुराल में समर द्वारा अपमानित और उपेक्षित होकर भी उसकी निंदा मायके में नहीं करती है . समर के अध्ययन में किसी प्रकार बाधा भी नहीं प्रस्तुत करना चाहती . सुहागरात में वह समर का यथोचित सत्कार न कर सकी ,दूसरी रात पुकारने पर भी समर बाहर चला गया और तीसरे दिन भोजन प्रसंग को लेकर उसे अपमान तथा तिरस्कार सहना पड़ता है परन्तु उसने साहस नहीं खोया . 

४. प्रगतिशीलता -

 प्रभा शिक्षित होने के कारण प्रगतिशीलता विचारों की पोषक है . भारतीय नारी की रूढ़िवादी व्यवस्था को वह पसंद नहीं करती है . आधुनिक फैशन की अंध भक्तिनी भी नहीं है . वह पर्दा प्रथा के विरुद्ध है .उसके पर्दा न करने तथा घूघंट न करने के कारण परिवार का कोप भाजन बनना पड़ता है . 

५.स्वाभिमानी - 

प्रभा एक स्वाभिमानी नारी है . वह ह्रदय से पति को आँखों में बसाना चाहती है ,वह चाहती है कि पति के चरणों में गिरकर अपना निष्कपट ह्रदय खोलकर रख दे ,परन्तु स्वाभिमान उसके मार्ग में बाधक बनता है .भाभी द्वारा समझाने पर भी वह स्वाभिमान के साथ कहती - "जबरदस्ती वहीँ कहीं जाकर सोऊ . मुझसे तो नहीं होता जिठानी जी ,कि कोई दुतकारता रहे और मैं पूँछ हिलाती रहूँ और तलुआ चाटती रहूँ ." 

६. चरित्रवान -

प्रभा एक चरित्रवान नारी है .वह पर्दा भले ही न करे ,परन्तु अपने जेठ ,साँस तथा ससुर से एक बार भी नहीं बोलती है ,और न सिर उठाकर देखती है .वह समर से साफ कहती है - "जिस दिन तुम मेरे चरित्र पर संदेह करोगे ,उस दिन जहर खा लूंगी .

७. सहचरी - 

प्रभा एक सच्ची सहचरी है . वह प्रत्येक संकट में समर का साथ देती ही ,सुझाव देती है . वह समर को हर परिस्थिति में समुचित प्रेरणा देती है .जब कभी समर घबड़ाता है ,वह साहस बाँधती है ." आज तुम कैसी बातें करते हो ,ए सब ? अरे जरा सी मुसीबत है ,दूर हो जायेगी . सपनों का सुख भी तो हम ही उठाएंगे. उनके लिए जरा से तकलीफ भुगत लेने से क्या हर्ज़ ही क्या है ? और चाहे ,तुम्हारे साथ हो या न हो मैं तो हूँ ही .."

इन चारित्रिक विशेषताओं के साथ - साथ प्रभा परिश्रमी ,अनुरागमयी ,विवेकशील ,महत्वाकांक्षी ,व्यवहार कुशल ,मातृत्व लालसा से युक्त नारी है .प्रभा का चरित्र एक भारतीय नारी का चित्र है . 

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