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प्रेम तुम्हारा

नही छुपाना चाहती मैं 
प्रेम
प्रेम
निशान अपनी उम्र का
मेरे बालों की सफेदी से
नहीं है मुझे कोई परेशानी 
क्या फकॅ पड़ता है अगर मैं
दिखने लगू बूढ़ी 
चाहे झुक जाए मेरी कमर 
टूट जाए मेरे सब दाँत
मेरी ऑखों की रोशनी खो जाए
मेरी यादाश्त गुम हो जाए
भूल जाउ मै सारी दुनिया
तुम्हारा प्रेम मेरा रक्षक है
तुम्हारा होना रब का होना!
जैसे जीने के लिए जरूरी साँसें
मेरे लिए तेरा प्रेम है ऐसा
फिर भी मुझे यकीन है ऐसा
मेरे लिए प्रेम तुम्हारा 
रहेगा पहले दिन के जैसा

यह रचना श्वेता सिंह चौहान जी द्वारा लिखी गयी है . आप अध्यापिका के रूप में कार्यरत है और स्वतंत्र रूप से लेखन कार्य में संलग्न हैं . 

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