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मैं फिर चीखा

आज मैं 
अशोक बाबू माहौर
अशोक बाबू माहौर 
फिर चीखा 
डरावना स्वप्न देखा 
माँ ने मुझे डाँटा
किन्तु क्या ?
हवा थी I 

सुबह चारों तरफ 
आवाजें कोलाहल सी 
मैं निहारता 
जब तक 
किसी अजनबी ने 
मुझे साधा 
'क्यों भाई 
डरे हो 
सुबह हो गई 
बस थोड़ा सा झंझावात है I '
मैं ठगा
खड़ा 
करता रहा मन मंथन I 


रचनाकार परिचय नाम-  अशोक बाबू माहौर 
जन्म -10 /01 /1985 
साहित्य लेखन -हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में संलग्न 
प्रकाशित साहित्य-विभिन्न पत्रिकाओं जैसे -स्वर्गविभा ,अनहदकृति ,सहित्यकुंज ,हिंदीकुंज ,साहित्य शिल्पी ,पुरवाई ,रचनाकार ,पूर्वाभास,वेबदुनिया आदि पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित I  
साहित्य सम्मान -इ पत्रिका अनहदकृति की ओर से विशेष मान्यता सम्मान २०१४-१५ से अलंकृति I 
अभिरुचि -साहित्य लेखन ,किताबें पढ़ना 
संपर्क-ग्राम-कदमन का पुरा, तहसील-अम्बाह ,जिला-मुरैना (म.प्र.)476111 
ईमेल-ashokbabu.mahour@gmail.com8802706980

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