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हे औरत !

हे औरत!
तू कल भी अश्रु बहाये,
तू आज भी अश्रु बहाये!
क्या अधिकार में तेरे,
पूजा
पूजा
सिर्फ अश्रु ही आये!

गूंथकर यह किसने ,
अश्रु लड़ी तुझे पहनाई!
भीतर से चाहे कितनी टूटी,
बाहर से तू मुसकाई!

जन्म हुआ जब तेरा,
नहीं बजाई तालियाँ,थालियाँ!
विलाप किया तेरे होने पर,
पीटी गई सिर और छातियाँ!

लोभ,क्रोध,द्वेष पुरुषों के खाते,
करुणा,प्रेम,दया तेरे खाते आयी!
दुःख किसी को  हो  घर में,
अश्रु की नदियाँ तूने बहायी!

तुझे देख लगता है,
प्रकृति में तू ही समाई!
देना ही सीखा तूने,
लेने पर तू घबराई !

रचनाकार परिचय                     
पूजा
रुचि-हिन्दी और बांग्ला साहित्य पढ़ना,लेखन कार्य
पता-बेहट,सहारनपुर(उत्तर प्रदेश)
शैक्षिक योग्यता- शिक्षा स्नातक और परास्नातक

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  1. सुंदर रचना है आपकी पूजा

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  2. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  3. आदरणीय
    हिंदी कुञ्ज एक कुंजीपटल है पढने में आनंद अत है पर इसकी कापी कर फेसबुक पर पेस्ट क्यों नहीं कर सकते भले ही हिंदी कुञ्ज फेसबुक पर है पर एक एक कर पढना जैसे गीता का अद्धयाये पढना जैसा होता है पिछले आठ वर्षों से पढ़ रही हूँ सुंदर लेख कविता
    धन्यवाद
    गुड्डो दादी फ्रॉम शिकागो

    उत्तर देंहटाएं

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