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जागती आँखों के सपने

जागती आँखों के सपने
कभी हसीन नहीं होते हैं।
गरीबी में जन्मते हैं ,
जागती आँखों के सपने
संघर्ष में पलते हैं।
खुली आँखों के सपनों में
बेचारी  है व्यथा है।
दर्द है ,दवा है।
टूटी खाट है ,बीमार माँ है।
खेतों में जुता बाप है।
हाड़ तोड़ मेहनत है।
फटी कमीज है।
सरकारी स्कूल है।
फटी सरकारी किताबें हैं।
फटी टाट पट्टी है।
इल्ली वाला मध्यान्ह भोजन है।
ऊंघते गुरूजी हैं।
गांव से शहर की आसमानी दूरी है।
आरक्षण का सांप है।
नीलाम होती सीटें हैं।
गुलाबी नोटों वाले इंटरव्यू हैं।
चमचमाती कारें हैं।
गगनचुम्बी इमारतों  बीच।
फुटपाथ पर भूख से लबालब।
जागती आँखों का सपना है।
संघर्ष हैं शूल हैं।
गर्द है धूल है।
अपनी अपनी अभिव्यक्तियाँ हैं।
भागता विकास है।
सुनहरे भविष्य की आस है।
लेकिन खुली आँखों के सपने
 किसी को पुकारते नहीं हैं।
एक बार ठान लिया
तो कभी हारते नहीं हैं।



यह रचना सुशील कुमार शर्मा जी द्वारा लिखी गयी है . आप व्यवहारिक भूगर्भ शास्त्र और अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक हैं। इसके साथ ही आपने बी.एड. की उपाध‍ि भी प्राप्त की है। आप वर्तमान में शासकीय आदर्श उच्च माध्य विद्यालय, गाडरवारा, मध्य प्रदेश में वरिष्ठ अध्यापक (अंग्रेजी) के पद पर कार्यरत हैं। आप एक उत्कृष्ट शिक्षा शास्त्री के आलावा सामाजिक एवं वैज्ञानिक मुद्दों पर चिंतन करने वाले लेखक के रूप में जाने जाते हैं| अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में शिक्षा से सम्बंधित आलेख प्रकाशित होते रहे हैं | अापकी रचनाएं समय-समय पर देशबंधु पत्र ,साईंटिफिक वर्ल्ड ,हिंदी वर्ल्ड, साहित्य शिल्पी ,रचना कार ,काव्यसागर, स्वर्गविभा एवं अन्य  वेबसाइटो पर एवं विभ‍िन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाश‍ित हो चुकी हैं।आपको विभिन्न सम्मानों से पुरुष्कृत किया जा चुका है जिनमे प्रमुख हैं :-
 1.विपिन जोशी रास्ट्रीय शिक्षक सम्मान "द्रोणाचार्य "सम्मान  2012
 2.उर्स कमेटी गाडरवारा द्वारा सद्भावना सम्मान 2007
 3.कुष्ट रोग उन्मूलन के लिए नरसिंहपुर जिला द्वारा सम्मान 2002
 4.नशामुक्ति अभियान के लिए सम्मानित 2009
इसके आलावा आप पर्यावरण ,विज्ञान, शिक्षा एवं समाज  के सरोकारों पर नियमित लेखन कर रहे हैं |

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