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ऋतु बसंत की है आई

गगन में घन घटा घिर आई 
पेड़ों की कलियाँ निकल आई 
बच्चों ने कविता दोहराई 
ऐ भाई... 
बसंत
देखो,ऋतु बसंत की है आई |

बिजली ने जब कड़क सुनाई 
सरसों में बैठी हिरणी घबराई 
मम्मी ने गायें नहलाई 
ऐ भाई... 
देखो,ऋतु बसंत की है आई |

इन्द्र ने बूँन्दे बरसायी 
खेतों में हरियाली छायी 
कोयल ने भी कूक सुनाई 
ऐ भाई... 
देखो,ऋतु बसंत की है आई |

सरसों की फसलें लहरायी 
पुष्पों पर छायी तरूणाई 
भ्रमर ने भी निगाहें बिछाई 
ऐ भाई... 
देखो,ऋतु बसंत की है आई |

भौर हुई तो चिड़ियाँ चहकाई 
बागों ने खुशबू महकायी 
घर-घर बजने लगी शहनाई 
ऐ भाई... 
देखो,ऋतु बसंत की है आई |

रचनाकार परिचय 
रमेश कुमार(रमेश घासोलिया)
पता:-गाँव-गोगटिया कच्छावतान,
पोस्ट-ढाणी-कुम्हारान,
तहसील-तारानगर,
जिला-चुरू(राजस्थान)पिन कोड-331304
संपर्क- 09587965605

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