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तुम मुझे फिर मिलना

तुम मुझे फिर मिलना
तबले की ताल बनकर
वीणा की झंकार बनकर
दुःख में सुख बनकर
बरखा में छाता बनकर
प्रेम

तुम मुझे फिर मिलना
किसी कविता की
अविस्मरणीय पंक्तियाँ बनकर
प्रेम पर आधारित किसी
उपन्यास का विराम बनकर
सुबह-सुबह घास पर
तुहिन-कण बनकर
पक्षियों के वृंद का कलरव बनकर

तुम मुझे फिर मिलना
प्यार बनकर,अहसास बनकर
गीत-संगीत बनकर
निंद्रा में स्वप्न बनकर

न मिलना सरपट दौड़ती
गाड़ी की गति बनकर

बल्कि मिलना
कछुए की चाल बनकर
और मिलना
मृत्यु के निकट
मेरी अंतिम इच्छा बनकर।।

नाम-आमिर 'विद्यार्थी'
पता-जामिया मिल्लिया इस्लामिया,केंद्रीय विश्वविद्यालय,नई दिल्ली-110025

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