1
Advertisement

तुम्हारी याद आती है

जब अमावस का चॉद छुप जाता हैं
याद आती हैंजब सडको पर वीराना छा जाता हैं
तब घर के किसी कोनें में बैठें
तुम्हारी बहुत याद आती हैं ...............

जब सावन की बूंदे नीचे आती हैं
जब सखियों के गीत गुञ्जारे जाते हैं
तब किसी झूलें के सहारे खडे
तुम्हारी बहुत याद आती हैं.............

जब होली के अंगारे जलते हैं
जब लोग मीठा खा कर गले मिलते हैं
तब कहीं सूनेपन में गुलाल थामें
तुम्हारी बहुत याद आती हैं ............

जब दोस्त आकर मुझसे मिलते हैं
जब हाल तुम्हारा मुझसे लेते हैं
तब मन में रोकर यहीं कहते हैं
तुम्हारी बहुत याद आती हैं ...........




  Name - Mohit Chauhan   
Dist.- Hardoi (UP)
Profession- Teacher
Hobbies- Reading and Writing

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top