0
Advertisement

तुम्हारे जाने के बाद 

तुम्हारे जाने के बाद
कितना कुछ बदल गया है अचानक ही
अब चांदनी रात का चाँद प्यारा नहीं होता
फूलों की रंगत फीकी सी हो रही है
पंछी खामोश से उड़ते रहते है
चिड़ियाँ चहचहाना भूल गई दिखती है
पेड़ो की पत्तियों पर पीलापन छाया है
तुम्हारे जाने के बाद
तुम्हारे जाने के बाद
मैं ज़रा सा लापरवाह हो गया हूं
बाइक की रेस बढ़ती ही जाती है
बहते पानी में तैरने से डर नहीं लगता अब
धुआँ कुछ ज्यादा ही प्यारा लगने लगा है
सिगरेट अब हर कहीं मिलने लगी है
गरम रोटी की खुशबू अब पहचानी नहीं जाती
अँधेरा अपना सा लगता है
और डर लगता है उजालों से
डर लगता है मुझे
मुझे डर लगता है तुम्हारे जाने के बाद
तुम्हारे जाने के बाद
याद नहीं रह पाता जो याद रहना है
भूलना ही याद है और यादें नहीं भुला पाता
तुम्हारे जाने के बाद दिन इतने लंबे हुए है
और रातों की लंबाई तो मापी नहीं जाती
तकिया भारी हो चुका हैं मेरे अश्क पीकर
बिस्तर रात भर चुभता है तेरी यादों की तरह
और आँखों की सूजन
होंठों की मुस्कान पर भारी पड़ती है
लोग कुछ ज्यादा ही हाल पूछते है हँसते हँसते
तुम्हारे जाने के बाद
तुम्हारे जाने के बाद
किसी के आने कोई गुंजाइश नहीं रखी मैंने
तुम्हारे उपहार संभाल नहीं पाऊँगा
मुझे माफ़ करना, माफ़ कर देना
जी नहीं पाऊँगा तुम्हारे जाने के बाद
और मरने में अब कुछ बाकी भी नहीं रहा
मैं ज़िंदा कहाँ हूँ?
मैं ज़िंदा कहाँ हूँ, तुम्हारे जाने के बाद ?



रचनाकार परिचय = साहित्य जगत में नव प्रवेश।  पत्र पत्रिकाओं यथा, राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, अहा! जिंदगी,  कादम्बिनी , बाल भास्कर आदि  में रचनाएं प्रकाशित। अध्यापन के क्षेत्र में कार्यरत।
संपर्क सूत्र - विनोद कुमार दवे,206 बड़ी ब्रह्मपुरी मुकाम, पोस्ट=भाटून्द ,तहसील =बाली ,जिला= पाली
 राजस्थान.306707.मोबाइल=9166280718 ईमेल = davevinod14@gmail.com

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top