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तुम बिन गुजर नही होती

कभी शब तो कभी सहर नहीं होती ।
ज़िन्दगी तन्हा बशर नही होती ।।
साधना सिंह
साधना सिंह 

मान लो बात,  लौट आओ तुम ।
अब तुम बिन गुजर नही होती ।।

तुम होते हो तो खुशियां होती है । 
किसी गम की फ़िकर नही होती ।।

इश्क कहते हैं कि अँधा होता है । 
क्योंकि रूह की नजर नहीं होती ।।

जब प्यार का हाथों मे हाथ होता है ।
फिर  दुनियां की खबर नहीं होती ।। 

 सुबह होती हैं या शाम होती हैं । 
तेरी यादों की दोपहर नहीं होती ।। 

लगता है जज्बात ये एकतरफा है ।
वरना मुहब्बत यूँ बेखबर नहीं होती ।। 

तुम ना लौटे अगर तो हम ही लौट जायेंगे ।
ये इन्तजार की चाकरी उम्रभर नही होती ।।

       ______ साधना सिंह 
    गोरखपुर 

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  1. साधना जी, बहुत अच्छा लिखती हैं आप, क़लम की धार को ऐसे ही निरंतर बनाये रखियेगा। बहुत बहुत शुभकामनाएं।

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  2. तुम ना लौटे अगर तो हम ही लौट जायेंगे ।
    ये इन्तजार की चाकरी उम्रभर नही होती ।।

    शब्दों की सुंदर माला,

    मुबारक हो.

    उत्तर देंहटाएं

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