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मुच्छो वाला साजन

विकाश शुक्ला
विकाश शुक्ला
आज पुरे १० साल के बाद ऊचें क्लास की पढाई संग डॉक्टरी कर के गुंजा अपने गांव वापिस लौट कर आई गांव में खबर हर तरफ थीं. सभी मिलने के लिए गूंजा के घर पर आने लगे पर गूंजा शहर की आवोहवा में वो इस कदर लिप्त हो चुकी थी की गांव का माहौल और व्यवस्था उसे रास न आरहा था. एक तरफ तो माँ और बापू से मिलने की ख़ुशी हो रही थी तो दूसरे तरफ शहर सा माहौल और हर कार्य में खुले पन की आजादी की कमी खल रही थी। गांव की सभी सखी सहेलियां जो बचपन से उनके साथी थी सभी की शादी हो चुकी थी और गांव की जो भी औरते गूंजा से मिलने आती वो गूंजा के स्लिम फ़ीट शरीर पर ही सवाल दाग देती की शायद शहर में अकेलेपन में ठीक से नही बना खा पाती होगी तभी इतनी कमजोर है और गूंजा को इनकी यही बाते चिढ़न का कारन बन जाती। ...... कितनी मेहनत से जिम और योगा और डाइटिंग करके अपना इस शरीर को ऐसे आकार दी है जिसे देख शहर की लडकिया और औरते जल मरती है और लड़के आहें भरते और गांव की औरतें इसे कमजोरी बता रही है जाहिल...... करीब एक हप्ता होने को आया अब वो शहर वापिस जाने की फ़िराक में थी की अब वो इस विषय में अपनी माँ से बात करेगी तभी उस दिन एक अलग ही वाक्या घट गया। शाम के समय गांव के मुखिया जी और उनका बेटा चन्दन उनके घर पर आये। चन्दन गूंजा का बचपन का साथी था और दोनों ने साथ साथ स्कुल में पढाई की थी। गूंजा चन्दन को देखकर बिलकुल हैरान थी अब चन्दन बिलकुल अलग दिखने लगा था .. हट्टा- कट्टा शरीर और मुँह पर तीखी मुछे जिसपर वो एक घंटे में करीब दशो दफे हाथ फेर कर उसे और भी तीखी और ऊपर की ओर मोडे जा रहा था। गूंजा से बात करने में संकोच कर रहा था पर जाते जाते गुंजा पर एक सरसरी नजर मारते हुए एक अजीब मुस्कान फेरता हुआ गया। 
रात में खाना खाने के वक्त जब बाबु जी मुस्कुराते हुए माँ को इशारा किया तब माँ ने गूंजा से पूछा - बेटी चन्दन तुझे पसंद है न मुखिया जी और तेरे बापू अगले महीने ही तेरी शादी चन्दन के साथ तय करने वाले हैं। माँ की बाते सुन कर गूंजा के तो जैसे पैरो तले जमीन ही खिसक गई हो। वो खाना को साइड करते हुए बोली - माँ मैं उस गंवार से शादी नही करने वाली और आप मुझे इसी लिए गांव वापिस बुलाई हो की आप मुझे गांव के एक मुच्छड़ जाहिल के पल्लू में बांध सको....... मैं डॉक्टर बनना चाहती हूँ और फिर बाद में शादी की सोंचुंगी की कब और किस से करना है। बापू का चेहरा सुर्ख लाल हो चूका था पर माँ ने उन्हें इशारे से शांत होने को कह बोली .. देख बेटी चन्दन कोई गंवार नही १२ वी पास और गांव का सबसे होनहार और इज्जतदार में एक है वो तुझे बचपन से चाहता है और तुझसे ही शादी करने की जिद कर बैठा है वरना उसके लिए तो लड़कियों की लाइन लगी पड़ी है और तेरे बापू भी उन्हें तेरी शादी की वचन दे चुके हैं और आज तू जिस ज्ञान के ऊपर इतरा रही है वो चन्दन की ही देन है वरना शहर में रखने और पढ़ाने की हमारी औकात कहाँ .... बेटी वो तुझे बहुत खुश रखेगा देख तेरे लिए ही गांव में एक प्राइवेट हॉस्पिटल खोलने वाला है मेरी बातों को मान जा बेटी। गूंजा कुछ बोली नही बस गुस्से में पैर पटकते अपने रूम में चली गई। वो आज वाकई गांव आकर पछता रही थी सब को उसकी कैरियर और इच्छाओ को दबा देने की पड़ी थी बस एक ही राग थी शादी कर देने की। इधर घर में शादी की दबाव बढ़ती ही जा रही थी उधर गूंजा की एक शहर की सहेली पूनम की इंगेजमेंट कुछ दिनों बाद थी उधर से भी इंगेजमेंट में आने का दबाव बना हुआ था .
गूंजा अपने मन में अपने सहेली पूनम के बारे में ही सोंच रही थी कितनी लक्की है वो अपने मन पसंद के लड़के से शादी कर रही है और क्या दोनों की जोड़ी भी जमती है एकदम सुपर्व...... आज उसने पूनम को अपनी व्यथा बता दी वो माँ बापू के शादी के बढ़ते दबाव के बारे में बता दी तब उसकी सहेली ने एक प्लान बनाया की तू एक काम कर किसी तरह तू अपने उस गांव के मुच्छड़ आशिक को भी अपने साथ मेरे इंगेजमेंट में लेती आ बाकी हम सब उसे इस पार्टी में इतना जलील करेंगे की वो तुझसे शादी तो दूर तेरी तरफ देखना भी भूल जायेगा। 
गूंजा को अपनी सहेली का ये आइडिया बहुत पसंद आया अभी सहेली की शादी में करीब महीने भर की देरी भी थी तब तक कुछ प्लान बनाने का वक्त तो था की तभी अगले सप्ताह ही गूंजा को चंदनद से मिलने का मौका मिल गया। खबर पता चला की चन्दन परसो शहर मोटर साइकल खरीदने गया था और रास्ते में कुछ हादसा घटा जिससे उसे काफी चोट भी आई ... जब माँ को पता चला की गूंजा चन्दन से मिलना चाहती है तो माँ बहुत खुश हुई बोली चल बेटी तू उससे मिलने जाएगी तो उसे काफी अच्छा लगेगा। चन्दन को देख कर लगा की वो काफी चोटिल है और चेहरा भी थोड़ा मलिन हुआ है। ..... जरूर इसकी ये हालात आवारागर्दी में हुई होगी। ...मूंछे भी तो डाँकू और आवारा की तरह दिख रहा जो अब भी तनी हुई थी .. इतनी बातो का द्वेष लिए दिल में और बनावटी मुश्कान बिखेरती गूंजा उससे उसका हाल चाल पूछी और मौका मिलते ही उसके कान में बोल दी की अगले कुछ सप्ताह तक मेरी खातिर ठीक हो जाओ मुझे मेरी सहेली की इंगेजमेंट अटेंड करवाने ले चलना। 
चन्दन बहुत खुश हुआ वो बोला मुझे कुछ नही हुआ आप जब भी बोलो आपके लिए कहीं भी चलने को तैयार हूँ। वादे के मुताबिक गूंजा के तैयार होने से पहले ही चन्दन अपनी मोटरसाइकल लिए दरवाजे पर हाजिर था। .. माँ ने बोला की रात ज्यादा होने से पहले ही आजाना और सम्हल कर जाना। बाइक पर बैठने से पहले एक नजर चन्दन पर डाली जख्म भर गया था पर निशान बरकरार थे पर उफ्फ ये जाहिलों सी मुच्छे। .... आज इस गंवार के साथ पार्टी में जाने में भी बेइज्जती सी महसूस हो रही थी पर इससे पीछा छुड़ाने की पूरी ख़ुशी भी थी तभी घर से निकलने वक्त सहेली को उसको साथ लेन का इत्तला करवा दिया। २ घंटे बाइक का सफर उबाऊ सा था पर शाम अंधियारे घिरते ही हम शहर पहुँच गए सारे दोस्त यार पहले ही आचुके थे। न चाहते हुए भी गूंजा अपने चेहरे पर मुस्कान बिखरते हुए चन्दन को अंदर साथ आने का इशारा किया और सभी दोस्तों को सामने देख खुद को नही रोक सकी उनसे मिलने में रम सी गई तभी पूनम ने पूछा की तेरा मुच्छो वाला आशिक किधर है जरा हम भी तो उस बकरे को हलाल करने से पहले देखें तभी गूंजा ने इशारा किया चन्दन की तरह जो की मेन हॉल के एक कोने में अजनवी की तरफ खड़ा था। भीड़ के कारण साफ नजर नही आ रहा था तभी गूंजा सभी सहेलियों और दोस्तों को प्लान के मुताबिक अपने साथ ले चन्दन से मिलवाने पहुंची। इससे पहले गूंजा चन्दन को सभी से उपहास भरे परिचय करवाती उससे पहले उसकी सहेली पूनम और उसके होने वाले मंगेतर जिसकी आज सगाई थी जाकर चन्दन से लिपट पड़े। जैसे की वर्षो बाद कोई अपना बिछड़ा मिला हो पूनम तो उसे देखकर रोने ही लगी बोली भइया आपने मुझपर इतना बड़ा उपकार किया और बगैर अपना परिचय और पता बताये चले भी गए। उसका मंगेतर गले से चन्दन के अभी भी लिपटा हुआ था और गूंजा बिलकुल हैरान ...... तभी पूनम के होने वाले मंगेतर ने सभी के सामने अलाउंस करके चन्दन का परिचय कराया और बताया की ये नौजवान वैसे तो रिश्ते में अब तक मेरा कोई नही था पर अब ये मेरा अपना खून है ..... सभी सुन कर हैरान थे और सबसे ज्यादा गूंजा। ... फिर पूनम के मंगेतर ने आगे बताया की कुछ समय पहले मैं और पूनम दोनों सगाई की के लिए जेवर और बैंक से कैश निकालकर शाम के वक्त घर को जारहे थे तभी कुछ बाइक सवार सुनसान रस्ते में इन्हें घेर कर सारे पैसे और जेवर छिनने की कोशिस की और जब उन्होंने इसका विरोध किया तो मेरे सर पर रोड दे मारा उसके बाद मुझे कुछ होंश नही रहा होंश खुला तो खुद को हॉस्पिटल में पाया देखा की ये नौजवान मेरे होंश में आने का इंतज़ार कर रहा है और होंश में आते ही मेरे जेवर और गहने मेरे हवाले कर दिया। तभी पूनम ने बताया था की इन्होंने अकेले ही उन गुंडों की खूब धुनाई की और उन्हें भगा डाला आपको हॉस्पिटल में एडमिट किया और सर में चोट लगने की वजह से शरीर से खून बहुत बह चूका था तो इन्होंने मुझे अपना खून दिया और तभी इन्हें मैंने अपना खून का रिश्ता बताया और जब तक पूनम पूरा व्यख्यान सुनाती तब तक ये वहां से जा चुके थे और मैं इस अजनवी फरिश्ता का नाम भी नही जान सका और आज इन्होंने मेरी इंगेजमेंट पार्टी में पधार कर मुझे वो ख़ुशी दी है जिसे मैं आजीवन नही भुला सकता। पूरा हॉल जो शांत होकर चन्दन की प्रशंशा सुन रहा था सभी अपने सीट से खड़े होकर तालियों से चन्दन की प्रशंशा की। गूंजा के आखो में पछतावा के आँशु निकल पड़े वो जिसे जीरो समझती आई वो आज सबके सामने हीरो बन चूका था। और जैसे ही ये खबर फैली की गूंजा की शादी चन्दन से जल्द होने वाली है सभी ने ढेरो शुभकामनायें दे डाली और गूंजा को ऐसा दिलवाले पति मिलने की बधाई भी दी।
पार्टी से विद होने के बाद गूंजा बहुत ही ख़ुशी मन से अपनी सहेलियों से विदा लिया सभी चन्दन को रोकना चाहते थे पर गूंजा अब कहाँ रुकने वाली। .....आज चांदनी रात की २ घण्टे की लंबी सफर और मुच्छो वाले साजन का साथ बिलकुल भी खोना नही चाहती थी।

पछतावा के आँशु ने मन के सारे मैल धो डाले अब वही जाहिल और उसकी रौबीली मूंछे उसे अनजाने प्यार के लिए आकर्षित कर रही थी।


रचनाकार परिचय 
विकाश शुक्ला
निवास स्थान - हनुमान मन्दिर, 
राजुपार्क,खानपुर,
नई-दिल्ली-110062

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