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तुम्हारे गुनाहों का सबूत

तुम्हारे गुनाहों का सबूत आयेगें जरूर !
तो हम भी कटघरे में जायेगें जरूर !
गुनाहों का सबूत

अब सजा ए उम्रकैद हो या मौत का फरमान ,
फिर भी इश्क की परम्परा निभायेगें जरूर !

मोहब्बत के रास्तों जितना ही सम्हलकर चलो ,
प्यार के नशा में कदम लडखडायेगें जरूर !

जिन्दगी की घडियाँ कुछ ऐसी है दोस्तों ,
हर हाल में इन्सान को आजमायेगें जरूर !

हम-तुम रहे या ना रहे इस जहाँ में ,
लेकिन वक्त अफसानें सुनायेगें जरूर !



यह रचना राहुलदेव गौतम जी द्वारा लिखी गयी है .आपने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की है . आपकी "जलती हुई धूप" नामक काव्य -संग्रह प्रकाशित हो चुका  है .
संपर्क सूत्र - राहुल देव गौतम ,पोस्ट - भीमापर,जिला - गाज़ीपुर,उत्तर प्रदेश, पिन- २३३३०७
मोबाइल - ०८७९५०१०६५४

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