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आजादी का जश्न

जब जब ये तिरंगा आसमान को छुते सा लहराता है ।
मन पुल्कित हो उठता है,आदर से सिर झुक जाता है।।

हर इन्सान तब जाति- कौम से परे उठ हाथ उठाता है।
जब ओज से भरा राष्ट्रगान की ध्वनि कानों मे आता है।।

कितने अपनो के बलिदानों के प्रतिफल में मिली आजादी ये ।
आज अपनी धरती, अपना अम्बर और अपनी भारत माता है ।।

मत बांटो धर्म से ये धरती ,जुडे कर्म से अमन का दे संदेश ।
क्या तेरा है क्या मेरा है, ये क्लेश किसे भला भाता है ।।

मत तोडो स्वार्थ से ये बंधन, ये बंधन देश के मान का है ।
हिन्दु-मुस्लिम या सिख-इसाई सबका इसी मिट्टी से नाता है ।।

हो सबके सुख मे सबका सुख और हो नारी का सम्मान यहां ।
भुखा ना सोये कोई बच्चा , तब आजादी जश्न मनाता है।।

चलो, आज कसम ये खाये कि कल फिर ना कभी शर्मिन्दा हो ।
है देश का नमक सबके रग मे, देखे कौन ये फर्ज निभाता है ।।

साधना सिंह 
गोरखपुर 

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