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ठंड का मौसम

आखिर अब ठंडी अपनी पूरी जवानी पर है,किसी को नहीं बक्श रही है,जहाँ देखो वहीं कपड़ों की दुकान पर भीड़ है,बच्चों को तो ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है जवानों पर भी उतना असर नहीं डालती है जितना असर बूढ़ों पर कहर ढाती है वैसे ठंडी का मौसम तो हर मौसम से प्रिय मौसम माना गया है जिसे लोग बड़े बेसब्री से इंतजार
ठंड का मौसम
ठंड का मौसम
करते हैं जब आती है तो लोगों के चेहरे पर मुश्कान आ जाती है बड़े शौक से लोग स्वागत करते हैं और खूब जमकर नये नये पकवान बनाते हैं और खूब जम कर खाया पिया जाता है इस मौसम में चाहे जितना खाओ कोई दिक्कत हो ही नहीं सकती है | सब हजम हो जाता है आखिर सब मौसम में प्रिय मौसम कहलाने वाला इसलिये ही तो कहा गया है और इस मौसम में तरह तरह की तरकारी मिलती हैं सब्जियां हर प्रकार की बाजार में देखी जा सकती हैं जो मन करे वो खाये हर तरह की विटामिन मिलती है |
      इस मौसम में लोग तरह तरह के कपड़े निकालने प्रारम्भ कर देते हैं पुराना नया कपड़ा सब निकल आते हैं | मोटे कपड़ों की कीमत बढ़ जाती है | इसकी माँग भी बढ़ जाती है | दुकानदार भी मोटी कमाई इस मौसम में कर लेता है | हर समय दुकानों पर रौनक बनी रहती है | बाजारों की चहल पहल बनी रहती है | खरीददारी इस मौसम में अक्सर सभी करते हैं इस खास मौसम में रंग बिरंगे कपड़े पहन कर जब लोग सड़को पर निकलते हैं तो देखने वाले देखते रह जाते हैं बहुत सुंदर जॉकेट है कहां से ली कितनी कीमत है मैं भी ऐसे ही लूंगा जल्दी ही लूँगा वाह क्या स्वेटर है,लाल रंग का स्वेटर तो मन मोह लेता है| वैसे तरह तरह रंगों के स्वेटर बहुत सुंदर लगते हैं और यही मौसम होता है जब ऊँन बेचनेवाला घर घर बेचने जाता है तो मनमोहक अंदाज बन जाता है और हाँ इसी मौसम में शालों की तरह तरह किस्म देखकर मन प्रफुल्लित हो जाता है वास्तव में यह मौसम बहुत मजेदार होता है,मन को भा जाता है |
         इस मौसम में खेतों में लहलहाहट आ जाती है | चारो तरफ सरसों की पीली पीली रंग से पूरी धरा पर सुंदरता छा जाती है,मटर भी फूलने लगता है और गेहूँ की फसल भी इसी मौसम में होता है खासकर सरसों के फूल मन को खींच ले जाता है,बार बार मन सरसों के खेतों की तरफ भागता है रूकता ही नहीं है और तरह तरह की सब्जियां से खेत पूरी तरह ढके नजर आते हैं कहीं पालक की हरियाली से मन मदहोश हो जाता है तो कहीं लाल लाल टमाटर देखकर हृदय गदगद हो जाता है कहीं बैंगन तो कहीं फूलगोभी तो कहीं सेम की फलियां भी मन को आकर्षित कर जाती है जो गाँवों को हरा भरा बना देती है यही तो खाशियत है इस ठंडी ऋतु की जो मनभावन कर देता है आखिर इसी कारण से तो इस बेचारी ठंडी ऋतु की कीमत अपने आप बढ़ जाती है जिसका महत्व अनवरत बना ही रहता है जो कभी खत्म नहीं होता है इसलिये इस मौसम का इंतजार बड़ी बेसब्री से की जाती है |
         लेकिन जब भयानक सर्द पड़ती है तो बडे बड़ों को भी बाहर जाने से रोक देती है, कईयों की जान भी ले लेती है, लोग घर से बाहर नहीं निकलते जब गलन भरी हवा बहती है,शीतलहर से मौसम जब पूरी आगोश में होता है तो दाँत कड़कड़ाने लगते हैं,जानवरों पर भी मुसीबत आ जाती है, खासकर पक्षियों पर तो जैसे एक प्रकोप ही आ जाता है तो महसूस होता है कि यह बेचारी ठंडी अब किसी को नहीं छोड़ेगी सच में जहां अच्छाई होती है वहीं बुराई भी निवास करती है हर मामले में ठंडी रूचिकर है लेकिन दिसम्बर अन्तिम और जनवरी के शुरूआत की ठंडी से लोग कतराने लगते हैं उसके बाद तो न्यारा ही न्यारा मौसम हो जाता है| दोश्तों,इस समय शीत लहर बहुत तेजी से बह रही है,अपने को बचा कर रखिये नहीं तो सारा आनन्द रफूचक्कर हो जायेगा,सारा मजा किरकिरा हो जायेगा, इस वक्त इस मौसम का आनन्द रजाई में रह कर लिया जा सकता है |

यह रचना जयचंद प्रजापति कक्कू जी द्वारा लिखी गयी है . आप कवि के रूप में प्रसिद्ध हैं . संपर्क सूत्र - कवि जयचन्द प्रजापति 'कक्कू' जैतापुर,हंडिया,इलाहाबाद ,मो.07880438226 . ब्लॉग..kavitapraja.blogspot.com

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