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मैं अहंकार हूँ

मैं अहंकार हूँ
खुद को सर्वश्रेष्ट
समझने वाला
मैं एक अहंकार हूँ ।

दुनिया के दुखों में फँसे लोगों को देखकर
मैं फलता हूँ
फूलता हूँ और हर किसी के जेहन का 
मैं  श्रृंगार हूँ,
 गुड़िया कुमारी
गुड़िया कुमारी

हाँ,हाँ मैं अहंकार हूँ ।।
तुम भद्र हो
मैं रुपवान हूँ
तुम अपमानित हो
मैं गुणवान हूँ

तुम्हें दुनिया की
इस दशा से आँखें चार हैं
मुझे इसकी इसी दशा से प्यार हैं
क्योंकि मैं अहंकार हूँ ।।



मैं घट घट में वास करता हूँ
मेरे रुपों का अलग अलग प्रकार हैं
मेरी रग रग की अपनी अलग पहचान हैं
मेरी सांसों का अलग संसार है ।।
मैं न हारता

न हार मुझे स्वीकार हैं
इस बात से भी अनभिज्ञ नहीं
मेरा मरना एक चिरस्थाई सत्य हैं
फिर भी मुझे उन्हें सताना पसंद हैं
जो मुझसे भी लाच़ार हैं ।।


मुझे डुबना मंजुर  है
पर सच के आगे झुकना स्वीकार नहीं
दुसरों की आँसुओ में  मेरी कृतार्थ हैं
मैं अपनी गुणगान करने से लाचार हूँ
क्योंकि मैं अहंकार हूँ
हाँ, मैं अहंकार हूँ ।।



                                  गुड़िया कुमारी
                               धनबाद, झारखंड

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