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सपना

मैं रात भर सपना देखता हूँ |
सुबह उठकर कविता लिखता हूँ |
एक दिन,एक दिन मेरी पत्नी ने प्यार से पुछा,
कौन आती है सपनों में?
उसे कैसे समझाऊ ? उसे कैसे समझाऊ ?
“ कि मर्द के सपनों में पत्नी कभी नहीं आती |
डा.श्रीनिवास मूर्ति.के
डा.श्रीनिवास मूर्ति.के 

2. तेरी आँखे

तेरी आँखे में सागर की गहराई
तेरी आँखे आसमान की परछाई
तेरी काजल लगी आँखे मेरे दिल में
लकीर बनकर रह गई
अब मेरी आँखों में महज तेरी आँखे रह गई
तेरी कोमल निगाहें ,मेरे पत्थर दिल को पिघला दिया
मेरे दिल से दुनियाँ की सारी बातें मिटा दिया
तुम खामोश रहती पर आँखों से बहुत कुछ कहती .......
बहुत कुछ ..... बहुत कुछ .....

3.खुदा आज जीने का मौका दिया

जब उसकी तीन पहियाँ की गाड़ी दौडती है जिंदगी चलती है|
सूरज धरती पर उतरने से पहले ही वह कार्यरत होता है |
मुसाफिर को मांजिल तक पहुँचाकर मकसद पूरा करता है |
चेहरे पर मुस्कराहट , बातों में
आत्मविश्वास ,मशक्कत पर गर्व
हर दिन को समझता है एक पर्व |
मैंने एक दिन उनसे पूछा था आप इतने खुश कैसे ?
तब उसने कहा था –
खुदा आज जीने का मौका दिया कल क्यों नहीं देगा ?
पल भर के लिए मै सिकिंदर बना
उस आटोवाला में अरिस्टाटिल को देखा  .....

डा.श्रीनिवास मूर्ति.के 
सहायक प्राध्यापक
रेवा विश्वविद्यालय
बेंगलूरु |  

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