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धीरे धीरे प्यार को बढ़ाना है

आज हम प्यार के बारें में बात करेंगें और जानेंगें कि प्यार क्या चीज होता है, वास्तव में जिस चीज से हमारा लगाव हो जाता है तो कहा जाता है कि हमारा उस चीज से प्यार है, प्यार के बिना जीवन कचरे के समान है,मानव जीवन बेकार है,मानव होना ही सबसे बड़ा घातक है जहां प्यार नहीं वहाँ का वास्तविक सौन्दर्य बेकार है वहाँ मानवीय सौन्दर्य की कल्पना नहीं की जा सकती है | असीम सौन्दर्य की आशा यदि जीवित रखना चाहते हैं तो प्यार मानव समाज को करना ही पड़ेगा | प्यार के अभाव में जीवन बेकार स्वार्थी माना जाता है,वास्तव में जहाँ स्वार्थ हो वहाँ
प्यार
प्यार
वास्तविक प्यार पाने की संभावना बहुत कम ही होती है अतः जीवन को महान गौरवशाली बनाना है तो प्यार करना सीखना ही पड़ेगा अन्यथा जीवन जीने का कोई मतलब ही नहीं है |

प्यार धीरे धीरे बढ़ता है और जब यह प्यार बहुत अधिक हो जाता है तो वहाँ एक खून का रिश्ता हो जाता है जहाँ खून का रिश्ता होता है वहाँ असीम प्यार की अनुभूति हो जाती है और विशाल गहराई तक प्यार रहता है जिसको सदियों तक नहीं मिटाया जा सकता है और इस तरह का प्यार परिवार में जन्म लेता है | शादी के पहले हम एक दूसरे को बिल्कुल नहीं जानते हैं लेकिन शादी के बाद पति पत्नी के रिश्तों में प्रगाढ़ता धीरे धीरे आने लगती है और यह प्यार रूपी प्रगाढ़ता एक खून के रिश्तें में तब्दील हो जाता है तब इस प्यार में उत्पन पुत्र या पुत्री से हमारा प्यार बहुत गहरे संबन्धों की ओर ले जाता है जो कभी न खत्म होने वाला रिश्ता बन जाता है और ऐसा प्यार एक मजबूत डोर में बँधा हुआ प्यार माना जाता है जो यह दर्शाता है कि प्यार हमारे मानवीय संबन्धों को एक नया स्वरूप प्रदान कर रहा है |

आज हमारा जीवन कटुता की ओर बढता चला जा रहा है जिसका निराकरण करना बहुत मुश्किल है, लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हैं और प्यार नाम की चीज ही नहीं रह गई है मानवता पूरी तरह धूमिल होती चली जा रही है और मानवीय मूल्यों का अभाव होता नजर आ रहा है आज हमारा समाज पूरे रोष में है | जिन्दगी का कोई मतलब ही नहीं रह गया है,अमानवीय रूप लोग धारण किये जा रहे हैं अतः इसी कमी के कारण हमारे रिश्तों में दरार आ रही है अहम भावना घर कर गई है जहाँ इस तरह की भावना का प्रवेश है वहाँ का मानवीय अस्तित्व खतरें में माना जाता है और यह दुर्भाग्य है हमारे समाज में इस तरह का कटुता का दौर चल रहा है |

प्यार का न होना मानवता के लिये घातक है जो मानवता के लिये घातक है वह किसी समाज के लिये स्वीकार्य नहीं है | हमें इस वीभत्स रूप से निकलना होगा तभी एक मानवीय स्नेह जिन्दा रह पायेगा अन्यथा जीवन के अस्तित्व से खिलवाड़ करना है | हमें अपने विचारों में प्यार की भावना का विशेष महत्व रखना ही होगा ताकि विकास तथा सहीं जीवन के मर्म को समझा जा सके | आज हमारे समाज में जो कटुता है,जो यह खालीपन है,वह हमारी नीचता व दुर्भावना के कारण है, हमारा अस्तित्व खतरें में है,इसी कारण हमारा सम्बन्ध मानव से कटता जा रहा है अतः मानवीय प्यार को जिन्दा रखना है तो प्यार को बढ़ाना है सहीं समझ बनाना है तभी हमारा मानवीय संबन्ध कभी न टूटने वाला होगा |

जयचन्द प्रजापति 'कक्कू'
जैतापुर, हंडिया, इलाहाबाद
मो.7054868439

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  1. प्रेम जिंदगी का सबसे सुंदर भाव हैं. इस भाव में डूब कर ही हमे जिंदगी जीने का सलीका आता हैं. बहुत ही सुंदर लेख लिखा हैं. मेरे अंदर प्रेम की भावनाओ के सागर को कुछ और पंक्तियाँ मिल गयी हैं आपके इस सुंदर लेख से.
    आपका बहुत बहुत धन्यवाद! :)

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