0
Advertisement

दर्द होता है

दर्द होता है जब अपने
रूठ जाते हैं बिन बताए
सहसा एक टीस-सी उठती है
मन में बार-बार
मुज़म्मिल
मुज़म्मिल
जब दूर चले जाते हैं
अपने बिन बताए
आदमी बनता है,
टूटता है,बनता है
जब याद आती है उनकी
जो चले जाते हैं बिन बताए
कोई तो हो जो बताए
अपनें क्यों चले जाते हैं बिन बताए
वो भी अक्सर कहा करते थे
हम वो नहीं जो
चले जाते हैं बिन बताए
मैं पागल ही था
जो अक्सर उनकी बातों में उलझा रहा
एक दिन ऐसा आया
वो भी चले गए बिन बताए।

नाम-मुज़म्मिल
पता- न्यू मुस्तफाबाद, नई दिल्ली-110094

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top